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केस वापस लेने पर जज रवि कुमार दिवाकर ने लिखा, 'न्यायाधीश के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए'?

By Dilshad Ali Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 17 Sep 2026 07:27 PM (IST)

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी अदालत से 97 हत्या के मामलों को वापस लेने के ...और पढ़ें

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर। जागरण

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर। जागरण

HighLights

  1. आरोपित को दोष मुक्त करते हुए न्यायाधीश दिवाकर ने निर्णय में लिखा।

  2.  जज दिवाकर की कोर्ट से हत्या की 97 पत्रावलियां ले ली गई थीं वापस

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय व विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट रवि कुमार दिवाकर ने उनकी कोर्ट से हत्या के 97 केस रिकाल (वापस) करने के आदेश पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं।

गुरुवार को एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपित को दोष मुक्त करते हुए जज दिवाकर ने निर्णय में लिखा कि एक न्यायाधीश का काम न्याय करना होता है और यदि उसी के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए? क्या एक न्यायाधीश, जिला जज के ऐसे आदेश जो कि विधि के विपरीत हैं, को मानने के लिए बाध्य है अथवा नहीं?

जज दिवाकर 29 नवंबर 2025 को जनपद में पदभार ग्रहण करने के बाद से हत्या के 10 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। गुरुवार को जज ने अशोक भारती निवासी पटेलनगर रजवाहा रोड वाल्मीकि बस्ती को 150 ग्राम चरस बरामदगी के 12 वर्ष पुराने मामले में दोषमुक्त किया।

न्यायाधीश ने पुलिस और अभियोजन के साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। निर्णय में जज दिवाकर ने उनकी कोर्ट से हत्या की 97 पत्रावलियां वापस लेने पर पुन: सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा कि दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 409 (2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) 2023 की धारा 449 (2) यह प्रविधान करती है कि पार्ट हार्ड (अधसुनी या आधी सुनी गई सुनवाई) फाइलों को सेशन जज रिकाल नहीं कर सकते हैं, लेकिन तत्कालीन जिला जज ने 18 अगस्त को एक ही तरह के नौ आदेश पारित कर उनके न्यायालय से हत्या के गंभीर मुकदमों की पार्ट हार्ड 97 पत्रावलियों को अपने न्यायालय में रिकाल किया।

यह आदेश अपने आप में विधि के विपरीत था और जिला जज ने अपने रिटायरमेंट के मात्र 13 दिन पूर्व बिना कारण बताए यह आदेश किया था। जो मामले पार्ट हार्ड नहीं हैं, जिला जज उन्हीं पत्रावलियों को रिकाल कर सकते हैं, लेकिन उसमें भी कारण बताना होगा।

'तब भ्रष्ट होने की संभावना बढ़ जाती है'

जज रवि कुमार दिवाकर ने निर्णय में लार्ड एक्टन (उन्नीसवीं सदी के इंग्लैंड के सबसे प्रख्यात इतिहासकारों में से एक) के एक कथन का जिक्र किया है। लिखा कि जब किसी व्यक्ति को अधिकार या शक्ति मिल जाती है तो उसके भ्रष्ट होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

उन्होंने लिखा जब किसी व्यक्ति के पास बहुत अधिक शक्ति आ जाती है तो वह अक्सर अपने फायदे के लिए उसका गलत इस्तेमाल करने लगता है। शक्ति स्वयं में न तो अच्छी होती है और न बुरी, उसका स्वरूप इस बात पर निर्भर करता है कि उसे धारण करने वाला व्यक्ति उसका उपयोग किस प्रकार करता है।