बैलों के बुढ़ापे का सहारा बने ब्रजवीर, छह साल से कर रहे सेवा, बोले- मर भी गए तो फार्म पर बनाएंगे समाधि
मुजफ्फरनगर के किसान ब्रजवीर सिंह अपने बूढ़े बैलों की छह साल से सेवा कर रहे हैं, जिन्होंने उनके खेतों में करीब दस साल काम किया।

HighLights
ब्रजवीर सिंह छह साल से बूढ़े बैलों की सेवा कर रहे।
पुलिस ने 2011 में कटान से मुक्त कराकर गोशाला में छोड़ा था।
मृत्यु के बाद फार्म पर बैलों की समाधि बनाएंगे।
रोहिताश्व कुमार वर्मा, मुजफ्फरनगर। आज के दौर में जहां स्वार्थवश लोग अपने बुजुर्गों से भी किनारा कर लेते हैं, वहीं मुजफ्फरनगर के किसान चौधरी ब्रजवीर सिंह बेजुबान पशुओं के प्रति संवेदना और सेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं।
जिन दो बैलों ने करीब दस वर्ष तक उनके खेतों में परिवार के सदस्य की तरह काम किया, उन बूढ़े हो चुके बैलों की सेवा वह छह वर्षों से कर रहे हैं।
उम्र बढ़ने के कारण दोनों बैल अब खेती के काम के लायक नहीं रहे, लेकिन ब्रजवीर का लगाव आज भी पहले जैसा है। उन्होंने यह तय किया है कि दोनों बैलों की मृत्यु के बाद उन्हें अपने फार्म पर दफनाकर उनकी समाधि बनाएंगे।
कटान से मुक्त कराकर गोशाला में छोड़े गए थे बैल
वर्ष 2011 में पुलिस ने कटान के लिए ले जाए जा रहे कुछ बैलों को मुक्त कराकर शुकतीर्थ स्थित गोशाला में भेजा था। गांव कूकड़ा निवासी किसान ब्रजवीर सिंह गोशाला से दो बैलों को पांच हजार रुपये की दान रसीद कटवाकर मोरना-शुकतीर्थ स्थित राठी फार्म हाउस पर ले आए।
दोनों बैलों से उन्होंने करीब एक वर्ष तक खेतों में जुताई कराई। उसके बाद उन्हें गोशाला में वापस छोड़ दिया, मगर बैलों से ब्रजवीर का ऐसा लगाव हो गया कि उनका मन नहीं लगा। पांचवें दिन जब वह गोशाला पहुंचे तो दोनों बैल उन्हें देखते ही खड़े हो गए।
यह दृश्य देखकर ब्रजवीर भावुक हो गए और दोनों को दोबारा अपने फार्म पर ले आए। इसके बाद वर्ष 2020 तक दोनों बैल उनके खेतों में जुताई करते रहे और परिवार का हिस्सा बने रहे।
बुढ़ापे में सेवा करने की ठानी
जब दोनों बैल उम्रदराज होकर खेती के काम के लायक नहीं रहे, तो ब्रजवीर ने उन्हें बेचने या बेसहारा छोड़ने के बजाय उनकी सेवा करने का निर्णय लिया। छह वर्षों से वह स्वयं उनके चारे-पानी और देखभाल की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। वह दोनों बैलों को परिवार के बुजुर्गों की तरह मानते हैं और उनकी हर जरूरत का ध्यान रखते हैं।
मौत के बाद भी नहीं टूटेगा रिश्ता
ब्रजवीर सिंह कहते हैं कि इन बैलों ने करीब दस साल तक उनके साथ खेतों में काम किया और परिवार की खेती में योगदान दिया। अब बुढ़ापे में उनकी सेवा करना मेरा कर्तव्य है। उनकी मृत्यु के बाद भी हमारा रिश्ता खत्म नहीं होगा। मैं उन्हें अपने फार्म की जमीन में दफनाकर उनकी समाधि बनाऊंगा, ताकि उनकी याद हमेशा मेरे साथ रहे।
