ड्रग्स के साथ जब्त 15.40 लाख की नकदी रिलीज करने की अर्जी निरस्त, कोर्ट ने तत्कालीन SSP समेत 6 अफसरों पर कार्रवाई को लिखा
मुजफ्फरनगर न्यायालय ने नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले कैप्सूल, इंजेक्शन के साथ बरामद 15.40 लाख रुपये जारी करने की ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
एजीडी मेरठ, डीजीपी समेत अपर मुख्य सचिव गृह, लखनऊ को कार्रवाई को पत्र लिखा।
एनडीपीएस एक्ट के पालन में पुलिस की लापरवाही उजागर।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले कैप्सूल व इंजेक्शन के साथ बरामद 15.40 लाख की नकदी निर्मुक्त (रिलीज) करने की अर्जी न्यायालय ने निरस्त कर दी। साथ ही मामले में तत्कालीन एसएसपी, एसपी सिटी समेत छह पुलिस अधिकारियों की लापरवाही मानी है।
अदालत ने माना है कि इन अधिकारियों ने आरोपितों को जानबूझकर अनावश्यक रूप से लाभ पहुंचाने के लिए एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं में कार्रवाई नहीं की, जिससे कि आरोपित बड़ी आसानी से बरामद रुपये रिलीज करवा सकें।
न्यायालय ने इन छह अधिकारियों पर आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए एडीजी मेरठ, डीजीपी, अपर मुख्य सचिव गृह, लखनऊ तथा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, नई दिल्ली को इस आदेश की प्रति भेजने के लिए कहा है।
न्यायालय ने लिखा कि एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं में कार्रवाई न करने से यह निष्कर्ष निकलता है कि तत्कालीन एसएसपी की सहमति से यह कार्रवाई पुलिस ने की है। बरामद धनराशि कागजों में इतनी दिखाई गई है, जो इससे कहीं बड़ी हो सकती है।
नगर कोतवाली पुलिस ने दो फरवरी 2024 को अंबा विहार निवासी शाजेब सिद्दीकी व उसके तीन साथियों को पकड़ा था। पुलिस ने इनसे 1,920 कैप्सूल, 900 इंजेक्शन के अलावा स्विफ्ट डिजायर व कार से 23.69 लाख रुपये बरामद किए थे। पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। तब आरोपित अनुज ने 5.50 लाख रुपये 20 जनवरी 2025 को कोर्ट में अर्जी देकर निर्मुक्त करा लिए थे। इसी को आधार बनाकर आरोपित शाजेब ने भी अर्जी लगाई थी, जिसे हाई कोर्ट ने निरस्त कर स्थानीय न्यायालय के समक्ष अर्जी लगाने को कहा था।
इस पर आरोपित ने उससे बरामद 15.40 लाख रुपये निर्मुक्त करने के लिए एडीजे-तीन एवं विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट रवि कुमार दिवाकर के न्यायालय में अर्जी लगाई थी। मंगलवार को सुनवाई के बाद न्यायालय ने अर्जी निरस्त कर दी। न्यायाधीश ने तत्कालीन एसएसपी एवं वर्तमान में डीआइजी सहारनपुर अभिषेक सिंह, तत्कालीन एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति, तत्कालीन सीओ सिटी व्योम बिंदल, थाना प्रभारी रहे महावीर सिंह चौहान, विवेचक संजय गिरि, बरामदगी प्रभारी दारोगा विनोद कुमार के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
अवैध धन की विषबेल तक पहुंच पाना असंभव
न्यायालय ने लिखा कि प्रतिबंधित पदार्थ के व्यापार में अपार धन का निवेश किया जाता है और बहुत बड़ी मात्रा में अवैध लाभ भी कमाया जाता है। इसका कोई भी वैध लेखा-जोखा नहीं होता है। अवैध धन एक तरह से पूर्णतः कर मुक्त होता है। इस अवैध धन की विषबेल इतनी दूरी तक विभिन्न साधनों में विस्तृत रहती है कि उन तक पहुंच पाना लगभग असंभव सा हो जाता है। तस्कर इस अपार धन को विदेश में जमा कर देते हैं और यह अत्यंत गोपनीय ढंग से संचालित होता रहता है। आज भारत देश को इन्हीं सब गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है।
