जेएनएन, मुजफ्फरनगर। मोरना पीएचसी पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित जागरूकता शिविर का शुभारंभ करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष डा. वीरपाल निर्वाल ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। कोरोना निरोधक मुफ्त टीकाकरण, नि:शुल्क जांच व नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी रही है। प्रदेश सरकार की सजगता के चलते कोरोना के मामले नगण्य रह गए हैं। मनोरोगियों को दवा के साथ दयाभाव की भी आवश्यकता होती है। मानसिक रोगियों की जांच कर उनका उपचार कराएं। शिविर में प्रभारी चिकित्सक डा. अर्जुन सिंह ने कहा कि नींद का कम आना, चिंता, घबराहट, तनाव, अवसादग्रस्त होना, अनावश्यक टेंशन लेना आदि मानसिक रोग के लक्षण हैं, जिनका इलाज संभव है। स्वास्थ्य विभाग मुफ्त इलाज व जांच करता है। शिविर में मनोचिकित्सक डा. मनोज, डा. अर्पण जैन, नरेंद्र, अरविंद, सतेंद्र, अजय सक्सेना, अंगद प्रसाद, विजय शर्मा, अरबाज अली, मोनू, मोहसिन, अशोक, गौरव अली, प्रदीप निर्वाल, विजय राठी व नीटू सहरावत आदि मौजूद रहे।

जिला अस्पताल में मेडिकल के नाम पर मांगी रिश्वत, हंगामा

जेएनएन, मुजफ्फरनगर। शहर कोतवाली क्षेत्र के जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के नाम पर रिश्वत मांगने पर हंगामा खड़ा हो गया। जानकारी मिलने पर भाकियू अंबावता के पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने आरोपित कर्मचारी को हिरासत में ले लिया। हालांकि देर शाम दोनों पक्षों में समझौता हो गया।

मंगलवार शाम के समय महिला थाना पुलिस ने छपार निवासी महिला को जिला अस्पताल में मेडिकल के लिए भेजा था। आरोप है कि जिला अस्पताल में तैनात एक कर्मचारी ने महिला का मेडिकल करने के नाम 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इस पर महिला ने स्वजन को जानकारी दी। स्वजन ने भाकियू अंबावता के जिलाध्यक्ष शाह आलम को पूरा मामला बताया। शाह आलम समेत बड़ी संख्या में भाकियू अंबावता कार्यकर्ता और पदाधिकारी जिला अस्पताल पहुंच गए। मेडिकल के लिए रुपये मांगने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा कर दिया। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी को हिरासत में ले लिया और कोतवाली लेकर आ गई। बाद में दोनों पक्ष शहर कोतवाली पहुंच गए। देर शाम दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया, जिसके बाद पुलिस ने हिरासत में लिए गए कर्मचारी को छोड़ दिया। किसी भी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं दी गई।

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