चौंकिए मत! ये तस्वीरें सरकारी स्कूल की हैं, मंसूरपुर कंपोजिट विद्यालय दे रहा निजी स्कूलों को मात
मंसूरपुर का कंपोजिट विद्यालय स्मार्ट क्लास और आधारशिला लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं से निजी स्कूलों को मात दे रहा है।

मंसूरपुर स्थित कम्पोजिट विद्यालय की स्मार्ट क्लास में एलईडी स्क्रीन पर विद्यार्थियों को पढ़ाते शिक्षक निशांत। जागरण
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। बदलते समय के साथ सरकारी स्कूलों की छवि में भी बदलाव आ रहा है। सरकारी विद्यालय अब प्राइवेट स्कूलों को हर क्षेत्र में चुनौती दे रहे हैं।
इसका एक उदाहरण मंसूरपुर का कंपोजिट विद्यालय है, जहां न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि यह विद्यालय अभिभावकों की सोच को भी बदलने में सफल रहा है। यहां के शिक्षक बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। स्मार्ट क्लास, आधारशिला लैब और दीवारों पर लिखे प्रेरणादायक स्लोगन बच्चों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
खतौली ब्लाक के गांव मंसूरपुर में स्थित कंपोजिट विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कौशिक के पिछले 17 वर्षों के प्रयास आज बच्चों के लिए क्रांतिकारी साबित हो रहे हैं। उनकी मेहनत का परिणाम है कि गांव में दो सरकारी विद्यालय होने के बावजूद यहां बच्चों की संख्या लगभग 400 तक पहुंच चुकी है।
एनएमएमएस योजना में चार विद्यार्थियों का चयन
विद्यालय ने शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित किए हैं। शासन द्वारा संचालित एनएमएमएस योजना में इस विद्यालय के चार विद्यार्थियों का चयन हो चुका है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को 12वीं कक्षा तक सरकार द्वारा एक हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

मंसूरपुर स्थित कम्पोजिट विद्यालय में मानव हृदय के बारे में छात्र-छाओं को जानकारी देते शिक्षक विपिन। जागरण
विद्यालय में दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक शौचालय की व्यवस्था की गई है। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, और पूरे विद्यालय भवन में टाइल्स बिछी हुई हैं। बिजली की अनुपस्थिति में इन्वर्टर की सुविधा उपलब्ध है।
स्मार्ट क्लास से हो रही पढ़ाई
विद्यालय में स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई की जा रही है। यहां 102 इंच की एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। विज्ञान प्रयोगशाला का भी निर्माण किया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत स्थापित आधारशिला लैब बच्चों को हाईटेक और व्यावहारिक रूप से विज्ञान सिखाने का एक अनूठा माध्यम बन गई है। इस लैब के जरिए बच्चे विज्ञान, तकनीक, गणित और अंतरिक्ष की थ्योरी को केवल रटने के बजाय स्वयं प्रयोग करके सीख रहे हैं।

मंसूरपुर स्थित कम्पोजिट विद्यालय में मानव कंकाल के बारे में छात्र-छात्राओं को जानकारी देते अध्यापक विकास। जागरण
इस लैब में बच्चों को कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक, न्यूटन के नियमों, ग्रहों की गति और टेलीस्कोप के माध्यम से ब्रह्मांड की सैर करने का अवसर मिल रहा है।
सौर प्रणाली, रात और दिन की प्रक्रिया, फिजिक्स में लाइट, लेंस और साउंड, केमिस्ट्री में तापमान मापने से लेकर बैट्री की संकल्पना, बायोलाजी में मानव शरीर और सेल, गणित में अबेकस, तकनीक में सेंसर और व्यक्तित्व विकास की दिशा में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मंसूरपुर स्थित कम्पोजिट विद्यालय की आधारशिला लैब में टेलिस्कोप का अध्ययन करती छात्राएं। जागरण
इस लैब का उद्देश्य कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को किताबों में पढ़े गए बिंदुओं का प्रैक्टिकल अनुभव कराना है। इसके लिए तीन शिक्षक नियुक्त किए गए हैं, जो बच्चों को विज्ञान की अवधारणाओं को समझने में मदद कर रहे हैं।
