मुजफ्फरनगर [राशिद अली]। कठुआ दुष्कर्म व हत्याकांड में नाम आने के बाद बीएससी कृषि की पढ़ाई करने के लिए मुजफ्फरनगर के मीरापुर आकर रह रहे जम्मू के विशाल जंगोत्रा का करियर दांव पर लग गया था। गिरफ्तारी के बाद से अदालत का फैसला आने तक उसे करीब सवा साल जेल में बिताने पड़े। एसआइटी के जुटाए सभी सुबूत अदालत में फुस्स हो गए और विशाल बरी कर दिया गया।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ के एक गांव निवासी सांझीराम के पुत्र विशाल जंगोत्रा ने 12वीं पास कर मुजफ्फरनगर जिले के कस्बा मीरापुर बांगर के रसूलपुर गांव स्थित आकांक्षा कालेज में बीएसएसी कृषि प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। विशाल मीरापुर के मोहल्ला सब्जी मंडी में किराए पर कमरा लेकर रह रहा था।

जम्मू एसआइटी ने पकड़ा था

कठुआ में आठ वर्ष की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म व हत्या सुर्खियों में आने के बाद देश सुलग उठा था। विशाल जंगोत्रा पर मेरठ से वहां जाकर दुष्कर्म की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा। जम्मू एसआइटी ने मेरठ में चार दिन डेरा डालकर विशाल को गिरफ्तार कर लिया था।

फुटेज में मिले थे विशाल की बेगुनाही के सुबूत

बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में बरी होने वाला विशाल जंगोत्रा वारदात वाले दिन 12 जनवरी, 2018 को भी मीरापुर में ही था। इस बात का सुबूत कॉर्पोरेशन बैंक के एटीएम की सीसीटीवी फुटेज बनी। उसने एटीएम में डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किया था। खाते में राशि कम होने के चलते बैंक सरचार्ज कटने का ब्योरा बकायदा उसकी बहन की पासबुक में दर्ज हुआ था, जिसका डेबिट कार्ड विशाल इस्तेमाल करता था। एसबीआइ मीरापुर के एटीएम की फुटेज में भी विशाल 15 जनवरी, 2018 को दोपहर बाद 3.05 बजे एटीएम से एक हजार रुपये निकालता दिखाई दिया था।

12 जनवरी को दी थी स्वाइल साइंस की परीक्षा

विशाल जंगोत्रा ने मुजफ्फरनगर के खतौली के केके जैन पीजी कालेज परीक्षा केंद्र से परीक्षाएं दी थीं। पहले सेमेस्टर की 'स्वाइल साइंस' (मृदा विज्ञान) विषय की परीक्षा 12 जनवरी, 2018 को सुबह 10 से दोपहर बाद एक बजे तक थी। परीक्षा केंद्र की उपस्थिति पंजिका में भी विशाल के हस्ताक्षर पाए गए थे और उत्तर पुस्तिका में उसने उत्तर भी लिखे थे। वहीं, एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट में विशाल के स्थान पर किसी अन्य युवक को परीक्षा देना दर्शाया था।

फिर आवेदन करने पर हो सकता है विचार

कठुआ दुष्कर्म व हत्याकांड में कोर्ट ने विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया है। कोर्ट के निर्णय पर चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय की जांच समिति की भी नजर थी। कोर्ट में इस प्रकरण में सभी मूल दस्तावेज जमा होने की वजह से जांच समिति की जांच पूरी नहीं हो पाई। समिति के सदस्य के अनुसार अब कोर्ट के फैसले के बाद विश्वविद्यालय की जांच समिति का कोई औचित्य नहीं रह गया है। अगर विशाल दोबारा से अपनी डिग्री पूरी करने के लिए आवेदन करता है, तो इस पर विचार किया जा सकता है। हालांकि पहले सेमेस्टर में वह फेल हो गया था।

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Posted By: Umesh Tiwari

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