जानसठ (मुजफ्फरनगर) : सावन माह की शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर गंगाजल लेने हरिद्वार गए शिवभक्तों की वापसी अंतिम चरण में पहुंच गई है। मार्ग पर भोलों के सैलाब के चलते पानीपत-खटीमा मार्ग पूरी तरह भोलों के रंग में रंगा नजर आया। केसरियां लिबास पहने शिवभक्तों के हजूम के कारण पानीपत-खटीमा मार्ग पर दूर-दूर तक केसरिया बिखरा नजर आया।

सावन माह की शिवरात्रि पर शिव¨लग का जलाभिषेक करने के लिए देशभर से करोड़ों श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार जाते हैं। इसी क्रम में जानसठ क्षेत्र के अलावा बिजनौर व मवाना आदि क्षेत्रों से लाखों शिवभक्त भी हर साल हरिद्वार जाते हैं। उक्त क्षेत्रों के शिवभक्त हफ्ते दस दिन पहले ही हरिद्वार के लिए रवाना हो जाते हैं, लेकिन उनकी वापसी जलाभिषेक से दो-तीन दिन पूर्व ही शुरू होती है।

इसी दौरान एनएच-58 को वाहनों के लिए प्रतिबंध करने के कारण सहारनपुर-मुजफ्फरनगर से मेरठ-दिल्ली जाने वाला तथा मेरठ-दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले वाहन पानीपत-खटीमा मार्ग से बाया जानसठ भेजे जाते हैं, जिसके चलते शिवरात्रि से दो दिन पहले इस मार्ग पर शिवभक्तों के साथ यातायात का बोझ भी काफी बढ़ जाता है। जाहिर है कि शिवभक्तों के साथ वाहनों के आवागमन को भी सुरक्षित निकालना स्थानीय प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। कन्या पूजन के साथ शिविर का शुभारंभ

बुधवार सुबह सिद्धपीठ श्रीज्ञानेश्वर महादेव मंदिर समिति की ओर से यज्ञ व कन्या पूजन के साथ कांवड़ सेवा शिविर व भंडारे का शुभारंभ किया गया। समिति से जुड़े प्रवीन तंवर, मनोज वर्मा व ज्ञानचंद सैनी आदि ने बताया कि यहां मंगलवार रात से ही हरिद्वार से शिवभक्तों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था, जो लगातार बढ़ता जा रहा है। आमतौर पर हर साल शिविर का शुभारंभ किसी गणमान्य व्यक्ति से कराया जाता था। यह परंपरा तोड़ते हुए बुधवार सुबह शिविर का शुभारंभ छोटी कन्याओं से कराया गया। समिति का उद्देश्य समाज में बेटियों का सम्मान और बढ़ाना है। बुधवार शाम तक सैंकडों शिवभक्त मंदिर पर पहुंच चुके हैं। रात तक यह संख्या हजारों में पहुंच जाएगी। आयोजन में प्रवीन धीमान, शिवकुमार, भूपेंद्र नागर, सत्यपाल, यनेश तंवर व नरेश ¨सघल आदि का सहयोग रहा। दूसरी ओर, खतौली तिराहा पर सोमवार से शुरू हुए जानसठ कावड़ सेवा शिविर में भी भोलों की संख्या काफी बढ़ गई है। संचालकों में शामिल मूलचंद सैनी, अशोक बाटला, सुरेश, गोपाल सैनी व प्रताप सैनी ने बताया कि शिविर में भोलों के आराम व भोजन करने के अलावा चिकित्सा व मनोरंजन का प्रबंध किया गया है। शिवभक्त भोजन व आराम करने के बाद डीजे पर नाच कर मनोरंजन करने के बाद रवाना हो रहे हैं। आकर्षक कांवड़ों को देखने के लिए शिविरों व राजमार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।

Posted By: Jagran

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