मुजफ्फरनगर में जयन्त चौधरी का सपा पर तीखा हमला, 'गिरा हुआ समाज' वाले बयान पर मांगा जवाब
Jayant Chaudhary: जयन्त चौधरी ने मुजफ्फरनगर में आयोजित समरसता सम्मेलन में समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला, सपा अध्यक्ष अखिलेश ...और पढ़ें

जनता इंटर कालेज में आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन को संबोधित करते जयन्त चौधरी।
HighLights
पचेंडा के जनता इंटर कालेज में आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन में बोले रालोद अध्यक्ष।
समाजवादी पार्टी पर रहे हमलावर, बिना नाम लिए अखिलेश व सपा के प्रदेश अध्यक्ष को घेरा।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल के सामाजिक समरसता सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जयन्त चौधरी ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। वे अखिलेश के चवन्नी से रुपया बनाने वाले तंज को भूले नहीं और इसी कड़ी में सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के मुजफ्फरनगर में दिए गए बयान पर भी पलटवार किया।
जयन्त ने कहा कि उनके प्रदेश अध्यक्ष से सवाल पूछना चाहते हैं कि वो किस समाज को कह रहे थे कि वह गिरा हुआ समाज था और उसे हमने उठाया। हिम्मत है तो ये भी बता दें कि कौन सा समाज था वो। जयन्त ने जवाब दिया कि यह वो समाज है, जिससे चौधरी चरण सिंह निकले। यह वो समाज है, जिसके नेता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर रहे।
यह वो समाज है, जिसने अहिल्याबाई होल्कर जैसी शासक देखा। आप उसको गिरा समाज बता रहे हो। अगर यह नहीं कहा तो फिर स्पष्टीकरण दे दो। जयन्त यहीं नहीं रुके, उन्होंने सपा छात्र सभा की नीली टीशर्ट वाली ड्रेस पर भी तंज कसा। कहा कि कुछ लोग टीशर्ट का रंग बदलकर पता नहीं क्या साबित करना चाह रहे हैं।
रविवार दोपहर पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र के मुस्तफाबाद पचेंडा गांव के जनता इंटर कालेज के मैदान पर आयोजित समरसता सम्मेलन में पार्टी का लक्ष्य अनुसूचित जाति के वोटर रहे। प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार एवं पुरकाजी विधायक के संयोजन में आयोजित इस सम्मेलन में अनुसूचित जाति के लोगों की बड़ी संख्या रही। इसमें जयन्त चौधरी ने संत रविदास और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और चौ. चरण सिंह के विचारों में समानता बताकर इस वर्ग के वोटरों को साधने का प्रयास किया।
जयन्त ने कहा कि देश के महान शासकों ने जातिवाद के खिलाफ काम किए। बाबा साहेब ने एनिहिलेशन आफ कास्ट (जाति का विनाश) नामक किताब लिखी। आंबेडकर का कोई एक रंग नहीं था। टीशर्ट का रंग बदलकर कुछ लोग साबित करना चाह रहे कि वे आंबेडकरवादी हैं। भारत के ध्वज में जो रंग हैं, वो सारे रंग बाबा साहब के हैं।
चौ. चरण सिंह ने भी इसी तरह जाति तोड़ो सम्मेलन किए। प्रदेश के शिक्षण संस्थानों का नाम जाति पर होता था। चौ. चरण सिंह की अपील पर ऐसे नाम बदले गए। चाहे वह रामपुर मनिहारान का गोचर महाविद्यालय हो, यहां पहले गोचर की जगह गुर्जर था। इसी तरह बड़ौत का जनता वैदिक कालेज पहले जाट कालेज बोला जाता था। आज किसी नेता में हिम्मत नहीं कि वह जाति वाले शिक्षण संस्थान का नाम बदल सके।
लखनऊ में पीसी-पीसी करने वाले नहीं जानते
जयन्त ने कहा कि वर्ष 2016-17 में गन्ने का भाव 305 रुपये। पिछले सत्र में यह 400 रुपये था। यह एथनाल नीति का लाभ है। 2016-17 में सितंबर तक 78 प्रतिशत गन्ना भुगतान हुआ था। वर्तमान में अब तक 95 प्रतिशत भुगतान हो चुका। यहां बैठे सब लोग एथनाल नीति का लाभ जानते हैं, लेकिन यह बात लखनऊ में पीसी-पीसी करने वालों तक नहीं पहुंचती।
