'जिसे समझा हमसफर, वही बना कातिल...' मुजफ्फरनगर में पत्नी को जिंदा जलाने वाले 'हैवान' को फांसी की सजा
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में पत्नी शहजादी की हत्या के दोषी पति नदीम को कोर्ट ने मृत्युदंड और एक लाख रुपये ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
न्यायालय ने निर्णय सुनाने के साथ मुस्लिम रिवाज समेत निकाह का उल्लेख किया।
लैला-मंजनू और शीरी-फरहाद की प्रेम कहानी का जिक्र, मार्मिक टिप्पणी भी दी।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। पत्नि शहजादी के हत्यारे पति नदीम को न्यायालय ने मृत्युदंड सुनाने के साथ एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
न्यायालय ने टिप्पणी में कहा कि एक महिला का जीवन केवल उसकी शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं है, उसके साथ उसकी गरिमा, स्वतंत्रता और मानवीय पहचान भी जुड़ी है। जिस निकाह को रहमत, साथ और अमानत का रिश्ता समझकर उसने (शहजादी) अपनाया था, उसकी रिश्ते में उसकी सांसों को आग के हवाले कर दिया। जिस शख्स को उसने अपना हमसफर और अपना महफूज ठिकाना समझा, वही उसकी जिंदगी का कातिल बन बैठा। वहीं न्यायाधीश ने पति-पत्नी के प्यार-मोहब्बत के अलावा लैला-मजनू, शीरी-फरहाद की प्रेमकहानी का उल्लेख भी किया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने बताया कि शाहपुर थाने में दिलशाद निवासी निवाड़ा, बागपत ने मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उसकी पुत्री शहजादी की शादी 10 जनवरी 2015 को नदीम पुत्र सलीम निवासी सितारा मस्जिद, कस्बा शाहपुर साथ हुई थी। शादी के बाद उसकी पुत्री का ससुराल पक्ष के लोग उत्पीड़न करते थे। दहेज में बाइक व एक लाख रुपये मांगते थे। उसकी बेटी ने पुत्र को जन्म दिया, उसके बाद भी ससुराल के लाेग तंग करते थे।
आरोप था कि 23 जुलाई 2018 की रात के लगभग 8.00 बजे उसकी बेटी शहजादी को पति नदीम समेत ननद व सास ने मारपीट की तथा मिटटी का तेल छिड़कर जला दिया। 28 जुलाई को विवाहिता की मौत हो गई थी। न्यायालय में आठ साल तक मुकदमे की सुनवाई चली। जिसमें अभियोजन ने 11 गवाह पेश किए। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट रखी थी। इसके बाद 27 अगस्त को न्यायालय ने पति नदीम को दोषी ठहराया था।
सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने हत्यारे पति को मृत्यदंड (फांसी) की सजा सुनाने के अलावा एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एक महिला का जीवन केवल उसकी शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं है, उसके साथ उसकी गरिरमा, स्वतंत्रता और मानवीय पहचान भी जुड़ी होती है। किसी महिला को हिंसक तरीके से जलाकर उसकी मृत्यु कारिरत करना उसके जीवन पर अंतिम आघात के साथ- साथ उसकी मानवीय गरिमा के प्रति गंभीर अवमानना को प्रर्शिशत करता है।
पति-पत्नी का संबंध प्यार-मोहब्बत पर आधारित
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने टिप्पणी में कहा कि पति-पत्नी का संबंध प्यार-मोहब्बत पर आधारित होता है। “लैला-मंजनू” तथा “शीरी-फरहाद” के प्यार-मोहब्बत के किस्सों का भी उल्लेख किया है। प्रेम अर्थात मोहब्बत में किसी की जान ली नहीं जाती है, ऐसा होता है प्रेम का संबंध अथवा पति-पत्नी का संबंध।
साक्ष्य की भाषा में व्यक्त करना कठिन
कुछ अपराध ऐसे होते हैं, जिनकी गंभीरता को केवल कानूनी धाराओं और साक्ष्य की भाषा में पूरी तरह व्यक्त करना कठिन होता है। किसी जीवित अबला महिला का आग की लपटों में घिरना, सहायता के लिए संघर्ष करना और अंततः जीवन खो देना ऐसी मानवीय त्रासदी है, जो अपराध के परिणाम से कहीं अधिक व्यापक पीड़ा को दर्शाती है। शहजादी आग लगने के बाद लगभग 98 प्रतिशत झुलस गई थी।
