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VIDEO: किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है 'ग्रेजुएट ई-रिक्शावाले' की स्टोरी, 60 हजार की नौकरी छोड़ बने सोशल मीडिया स्टार

By Ashu Singh Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 27 Aug 2026 07:18 PM (IST)

मुजफ्फरनगर के सुमित प्रजापति को अब 'ग्रेजुएट रिक्शावाला' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने ई-रिक्शा चलाते हुए सोशल मीडिया ...और पढ़ें

HighLights

  1.  ग्रेजुएट रिक्शावाला के नाम से देश-दुनिया में नाम कमा रहे मुजफ्फरनगर के सुमित।

  2. ई-रिक्शा लेकर हिमाचल प्रदेश के स्पीति पहुंचे, अब काजा जाने की तैयारी।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता, जरूरी है लगन, मेहनत और ईमानदारी से करने की। जनपद में भी एक ऐसा युवक है, जिसे ग्रेजुएट रिक्शावाला के नाम से देश-दुनिया में पहचान मिल रही है।

शहर से सटे शेरनगर गावं के मूल निवासी और वर्तमान में अलमासपुर के सुख विहार में रहने वाले सुमित प्रजाति की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद कोई अच्छा काम नहीं मिला। गाड़ी धुलाई, भवन निर्माण में ईंट ढुलाई से लेकर बैंक के लोन विभाग और क्रेडिट कार्ड स्कीम बेचने तक का काम किया।

इससे माह में मात्र आठ से 10 हजार रुपये कमाई हुई। इसी बीच हादसे में पिता गंभीर रूप से आग में झुलस गए। परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी युवा कंधों पर आन पड़ी। ऐसे में सुमित ने दिल पर पत्थर रखकर पिता के ई-रिक्शा को चलाने का निर्णय लिया। मजबूरी में लिए निर्णय से शुरुआत में बुरा लगा, लेकिन होम लोन, रिक्शा का लोन व अन्य कर्जा चुकाने और आर्थिक तंगी को देखते हुए मन लगाकर काम किया।

सुमित ने ई-रिक्शा उठाते वक्त यह संकल्प लिया था कि वह ये काम तो करेंगे लेकिन अनोखे ढंग से। वह वर्ष 2017 से ही कंटेंट क्रिएटर के रूप में काम करते थे। सबसे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर देखा कि ई-रिक्शा से कौन-कौन कंटेंट बना रहा है। इसके बाद उन्होंने अपना अनोखा अंदाज बनाया।

परिचित दर्जी से कपड़े (पैंट-शर्ट) सिलवाए और रिक्शा चलाते हुए कंटेंट बनाना शुरू किया। देखते ही देखते सुमित सोशल मीडिया स्टार बन गए। आज के समय में उनके व्यूज लाखों में हैं। रिक्शावाला बनने से पहले उन्होंने नगर के ही एक कंटेंट क्रिएटर की टीम में भी 60 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी की। उससे कुछ विवाद होने पर नौकरी छोड़ दी। सुमित बताते हैं कि नौकरी से कई गुणा अच्छा है बिजनेस करना।

यहां जितनी मेहनत करेंगे खुद के लिए होगी। दूसरे के गुलाम नहीं अपनी मर्जी के मालिक हो। शुरू में सुमित ने पांच-छह रील बनाईं जो देखते ही देखते प्रसारित हो गईं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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चैलेंज से मिली प्रसिद्धि, 35 लाख रुपये आया खर्च

सुमित ने जुलाई में एक चैलेंज यानी चुनौती ली। उन्होंने ऐसी जगह ईवी रिक्शा ले जाने की चुनौती स्वीकार की जहां अब से पहले कोई ईवी रिक्शा लेकर नहीं पहुंचा था। उन्होंने लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के स्पीति में से स्पीति को चुना और जुलाई में यात्रा शुरू की। सात दिन की यात्रा व कंटेंट क्रिएशन पर लगभग 35 लाख रुपये खर्च आया। सुमित 12 लोगों की प्रोडक्शन टीम लेकर चैलेंज पर गए थे।

साथ में दो ट्रक, दो कार और दो ईवी रिक्शा थे। सभी साथी उनसे एक-दो किलोमीटर के फासले पर चलते थे। जरूरत का सारा सामान लेकर गए जिससे आपात स्थिति में चैलेंज में कोई व्यवधान न पड़े। वे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस यात्रा के वीडियो साझा कर रहे हैं। अभी कई वीडियो बनाने शेष हैं। वे अगली यात्रा पर हिमाचल प्रदेश के काजा (स्पीति घाटी) में स्थित प्रसिद्ध चिचम ब्रिज जाएंगे। 

बस इतना सा ख्वाब है...

सुमित ने बताया कि ई-रिक्शा चलाकर वह 15 से 20 हजार रुपये महीना कमा लेते हैं। वहीं, सोशल मीडिया से एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति माह कमाई होती है। सुमित मुजफ्फरनगर के सबसे प्रसिद्ध कंटेंट क्रिएटर में से एक बनना चाहते हैं। इसके साथ ही उनका सपना एक बिजनेस शुरू करना है। सुमित कहते हैं कि उन्होंने बहुत गुरबत के दिन देखे हैं। अब वे खूब सारा पैसा कमाना चाहते हैं, लेकिन मेहनत के बल पर। वे जल्द ही स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा व्यापार खड़ा करेंगे।

पांच भाई-बहन, पिता चलाते हैं ई रिक्शा

सुमित के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं और मां गृहिणी हैं। उनके बड़े सबसे बड़े भाई पंकज कुमार पब्लिकेशन में काम करते हैं, उनसे छोटे कपिल कुमार गारमेंट शाप पर सेल्समैन हैं, फिर सुमित हैं, उनसे छोटे भाई निखिल कुमार अभी काम की तलाश में हैं। सबसे छोटी बहन इंदु पांचवीं कक्षा में पढ़ रही हैं।