मुजफ्फरनगर, जेएनएन। हैदरपुर झील और गंगा की गोद में छह माह बिताने के बाद मेहमान परिदे स्वदेश को लौटने लगे हैं। यहां प्रवास खत्म होने के बाद अपने आशियानों के लिए इन्होंने उड़ान भरना शुरू कर दिया है। पक्षियों की करीब 45 प्रजातियां यहां प्रवास के लिए आती हैं, इनमें अधिकांश लौट चुकी हैं। वन विभाग ने देसी और प्रवासी पक्षियों की झील में करीब 267 प्रजातियों को ट्रेस किया था।

कोरोना वायरस के कारण हैदरपुर झील में काम पर भी लॉकडाउन हो गया है। वाइल्ड लाइफ, वन विभाग ने झील पर 10 करोड़ से अधिक का प्रोजेक्ट बनाया है। कनाड़ा, रशिया, मंगोलिया आदि देशों से अक्टूबर माह में प्रवासी पक्षियों ने गंगा, झील की शोभा बढ़ाई। सर्दी के सीजन में विदेशों में बर्फ पड़ती है, जिस कारण इन बेजुबान परिदों का भोजन के साथ आशियाना भी तहस-नहस होता है। इसके चलते भोजन और अनुकूल जलवायु की तलाश में मेहमान पक्षी यहां पहुंचते हैं। शोधार्थी आशीष, डा. अमर सिंह, रोबिन राठी ने गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार के इंटरनेशनल पक्षी वैज्ञानिक डा. दिनेश भट्ट के निर्देशन में हैरदपुर वेटलैंड में लॉकडाउन से पहले सर्वे कर प्रवासी पक्षियों पर थ्योरी तैयार की है।

यह पक्षी अपने स्वदेश को लौटने लगे

आशीष ने बताया कि मध्य अप्रैल तक सभी प्रवासी पक्षी अपने मूल प्रजनन स्थानों को लौट जाएंगे। इन पक्षियों के क्रियाकलापों का अध्ययन करके रोचक जानकारियां जुटाई गईं है। स्वदेश की ओर उड़ान भरने वाले पेंटेड स्टोर्क, रुडी शेलडक, पोचार्ड, पिनटेल, वैगटेल स्टोर्क, गल्स, पाइड अवोसेट, ग्रे लेग्ड गीज आदि लम्बी दूरी के प्रवासी पक्षी हैं। लगभग एक सप्ताह पहले शुक्रताल के गंगा तटों से उड़ान भर चुके हैं। अपने मूल स्थान पर ही यह पक्षी प्रजनन क्रिया करते हैं।

सबसे ऊंची उड़ान में माहिर राजहंस

सुर्खाब पक्षी लद्दाख क्षेत्र से भारत के उत्तरी मैदानी भागों में सर्दियों में प्रवास करता है, जबकि नॉर्दन पेंटल एवं बैल्क विग्ड स्टिलिट मंगोलिया एवं यूरोप से आते हैं। इनमें राजहंस पक्षी मानसरोवर झील से सर्दियों में उत्तरी मैदानी भागों में आता है। यह पक्षी सबसे ऊंची उड़ान भरता है। कई बार इसे माउंट एवरेस्ट के ऊपर से भी उड़ते हुए देखा गया है। यह पक्षी विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर उड़ान वाला है।

Posted By: Jagran

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