जेएनएन, मुजफ्फरनगर। कृषि एवं खाद्य विशेषज्ञ देविदर शर्मा ने कहा कि किसान अपना पेट काटकर देश का पेट पालता है। 45 साल में किसान की आय बहुत कम बढ़ी, जबकि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की आय बेतहाशा बढ़ी है। किसानों को किसी तरह का भत्ता नहीं दिया जाता है, लेकिन सरकारी कर्मी को कई तरह के भत्ते दिए जाते हैं। किसानों की हालत सुधारने के लिए पुर्वाग्रह से मुक्त होना जरूरी है।

चौधरी छोटूराम डिग्री कालेज में 'सरोकार-2021' का आयोजन हुआ। जिसका विषय रहा 'नए दौर में खेती-किसानी की चुनौतियां'। मुख्य अतिथि देविदर शर्मा, प्राचार्य डा. नरेश मलिक एवं विशिष्टि अतिथि हरीश चौहान ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित किया। देविदर शर्मा ने कहा कि वर्तमान दौर में खेती को दोयम दर्जे की चीज मान लिया गया है। वहीं उद्योगों को सहयोग और बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि संबंधित जो सुधार दुनिया में असफल हो गए वे भारत में कैसे सफल कैसे होंगे? उन्होंने कहा कि सारी दुनिया में खेती पर संकट है, क्योंकि खेती को बाजार के हवाले कर दिया। किसान की आय पर कभी ध्यान नहीं दिया। इसी के चलते न्यूयतम समर्थन मूल्य पर हल्ला हो रहा है। किसानों को गांव से निकालकर शहरों में दिहाड़ी मजदूर बनाना सुधार नहीं है। विचार करना होगा कि आज उपज बढ़ने के बाद भी अन्नदाता आत्महत्याएं क्यों कर रहा है। अब समय आर्थक नीतियों को ठीक करने का है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डा. नरेश मलिक ने कहा कि आज खेती-किसानी के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। किसानों की आय कैसे बढ़ाई जा सकती है, यह सोचना होगा। कार्यक्रम संयोजक रोहित कौशिक ने 'सरोकार' कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए देविदर शर्मा का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डा. आरएम तिवारी, परमेंद्र सिंह, अश्वनी खंडेलवाल, मनु स्वामी, रामकुमार रागी, ए. कीतिव‌र्द्धन, निहार रंजन सोनू और डा. चन्द्रकान्त कौशिक, वीना गर्ग समेत सभी शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।

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