खतौली (मुजफ्फरनगर): मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को 256 चिकित्सकों को एमबीबीएस, एमडी और एमएस की डिग्री वितरित की गईं। मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक अपनाने पर जोर देते हुए चिकित्सकों से सप्ताह में एक दिन समाजसेवा करने की अपील की।

राज्यपाल ने कहा कि मेडिकल शिक्षा महंगी है। अभिभावक किसी तरह खर्च उठाते हैं, लिहाजा उनका सम्मान जरूरी है। अब ये छात्र चिकित्सक बनकर नई दुनिया में जाएंगे। मरीजों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के साथ उनके सामने अन्य चुनौतियां भी होंगी। ऐसे में तनावपूर्ण माहौल भी होगा, लेकिन वे अपना ख्याल रखें, संतुलित आहार लें।

उन्होंने मरीजों से मुस्कुराकर बात करने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा, चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से आधुनिक तकनीक आ रही हैं। चिकित्सक इन्हें अपनाएं। राज्यपाल ने चिकित्सकों के ग्रामीण क्षेत्र में कार्य न करने पर चिता जताई।

कहा, बड़ी संख्या में गरीबों को आयुष्मान योजना के बारे में पता नहीं है। चिकित्सक लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करें। अध्यक्षता चौ. चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने की। प्रधानाचार्य डॉ. कर्नल राना सुरेन्द्र सिंह ने कालेज की वार्षिक रिपोर्ट पेश की। कॉलेज के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने कालेज की जानकारी दी। सचिव संजय गुप्ता ने आभार जताया। कोषाध्यक्ष गौरव स्वरूप एवं निदेशक डॉ. अनिल अग्रवाल ने स्वागत किया।

इन्हें पदक से नवाजा

राज्यपाल ने पीजी में ओवरआल टॉपर एमडी फार्माकोलॉजी की सना रहमान को स्वर्ण पदक, डा. दिनेश सिंह चौहान को रजत पदक व एमएस बाइक्रो बायोलॉजी की डा. स्वाति तिवारी को कांस्य पदक भेंट किया। एमबीबीएस 2009 बैच के टापर नितिश शर्मा को स्वर्ण, मोनिका पुंडीर को रजत, दीपिका को कांस्य पदक भेंट किया। एमबीबीएस 2010 बेच की टापर विशाखा को स्वर्ण, सबा खान को रजत, सुमित अग्रवाल को कांस्य तथा एमबीबीएस 2011 के टॉपर अजय सहरावत को स्वर्ण, देवाशीष गुप्ता को रजत व कमल मावी को कांस्य पदक से नवाजा। राज्यपाल के सुझाव

1. हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए, इससे व्यक्तित्व का विकास होता है।

2. अच्छा काम करने वालों का उत्साहवर्धन करें।

3. किसी को हीनभावना से नहीं देखें, अपमान न करें।

4. हर कार्य को बेहतर ढंग से करें, असफलता पर निराश न हों। गाउन व हेट अंग्रेजों की पहचान

राज्यपाल ने कहा, दीक्षांत समारोह में गाउन व हेट का पहनावा बदलना चाहिए। यह वेशभूशा अंग्रेजों की पहचान है। वह कई कुलपतियों को इस पोशाक को बदलने का सुझाव दे चुके हैं। कुछ विश्वविद्यालयों में इसे बदला भी गया है। उम्मीद है कि अगले कार्यक्रम में यहां भी विद्यार्थी भारतीय पोशाक देखेंगे।

Posted By: Jagran

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