मुजफ्फरनगर,जागरण संवाददाता। विधानसभा चुनाव 2022 के माहौल में काली नदी के किनारे बसे गांवों की समस्याएं लोगों को याद आने लगी हैं। काली नदी में दूषित पानी के प्रवाह से भूगर्भ भी दूषित होता जा रहा है। काली नदी के किनारे बसे गांवों में चुनाव के प्रचार को पहुंचने वाले प्रत्याशियों से काली नदी के उत्थान और गांव में दूषित पानी की समस्या के निदान के लिए ग्रामीण बात करने का मन बना रहे हैं। विभिन्न समस्याओं के चलते काली नदी किनारे बसें गांवों के लोगों के लिए दूषित पानी और उससे होने वाली परेशानी बड़ा मु्द्दा बनी हुई है।

जनपद में पेपर मिलें सहित अन्य औद्योगिक इकाइयां क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों पर पूरी तरह से खरी नहीं उतरती हैं। पाबंदियों और जुर्माने के बाद भी बड़ी मात्रा में मिलों से डिस्चार्ज होने वाला दूषित पानी नालों के रास्ते शहर से होकर जा रही काली नदी में पहुंचता है। इसके चलते काली नदी और नालों के किनारे बसें गांवों में भूगर्भ जल दूषित होता जा रहा है। खतौली सहित अन्य कुछ क्षेत्र के गांव में नालों में काला पानी आने की परेशानी आ चुकी है, जिससे पीने से लोग परहेज करते हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्र में बीमारियों ने भी घर किया है। हा-हुल्ला होने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम पहुंचकर नमूने लेकर प्रयोगशाला तो भेजते हैं, लेकिन काली नदी में पानी की गुणवत्ता सुधार के लिए कोई ठोस कार्य नहीं होता। इस परेशानी से जूझ रहे गांव के लोग इस समस्या को बड़ा मु्द्दा बनाए हुए हैं।

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इन गांव का भूगर्भ जल दूषित

रतनपुरी क्षेत्र के गांव रामपुर, घनश्यामपुरा, समौली, डबल, इंचौड़ा, कितास, रतनपुरी, मंडावली खादर आदि गांव काली नदी के किनारे पर बसे हैं। नदी में बह रहे प्रदूषित जल के कारण इन गांवों में पेयजल की समस्या बहुत विकट हो चुकी है। हैंडपंप से निकलने वाला पानी भी प्रदूषित हो चुका है। जिससे दूषित पेयजल के कारण काली नदी के किनारे बसे गांवों में कैंसर का प्रकोप बहुत अधिक देखने को मिल रहा है। हेपेटाइटिस और त्वचा संबंधी रोगों के प्रसार भी काफी हद तक बढ़ा है। ग्रामीणों को कहना है कि कई ग्रामीण भी कैंसर से पीड़ित हैं। डेढ़ दशक पहले काली नदी का पानी बिल्कुल साफ हुआ करता था, लेकिन फैक्ट्रियों के प्रदूषित कचरा और पानी के काली नदी में गिरने के कारण अब इसका पानी पूर्ण रूप से दूषित जो चुका है।

Edited By: Jagran