मुजफ्फरनगर, जेएनएन। सफाई, सड़क, पेयजल एवं पथ प्रकाश जैसी आधारभूत सुविधाएं नागरिकों को मुहैया कराने वाली नगरपालिका का वार्षिक खर्च 155 करोड़ है, जिसके सापेक्ष वार्षिक आय केवल 133 करोड़ है। कर्मचारियों एवं अधिकारियों के वेतन तथा अन्य खर्च के लिए पालिका को सरकारी ग्रांट पर निर्भर रहना पड़ता है।

संसाधनों का विकास कर स्वयं की आय से शहरी क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी नगरपालिका परिषद की है। नगरपालिका परिषद की आय के प्रमुख साधनों में विभिन्न विभागों से वसूले जाने वाले विकास कर सहित गृह तथा जलकर एवं जल मूल्य शामिल हैं, जिसके एवज में नगरपालिका नागरिकों की आधारभूत सुविधाओं का ख्याल रखती है। पालिका आय का एक बड़ा भाग शहरी विकास पर खर्च होता है। शासन से मिलने वाली ग्रांट पालिका के लिए महत्वपूर्ण

नगरपालिका को विभिन्न मद जैसे गृहकर, जलकर तथा विभिन्न विभागों जैसे निबंधन आदि से प्राप्त होने वाली धनराशि प्रतिवर्ष 133 करोड़ है, लेकिन पालिका को निर्माण, सफाई, पथ प्रकाश, पेयजल तथा स्वास्थ्य सहित कर्मचारियों के वेतन पर 155 करोड़ वार्षिक खर्च करना पड़ता है। इसके चलते पालिका को प्रति वर्ष 22 से 23 करोड़ के लिए शासन की ग्रांट पर निर्भर रहना पड़ता है। नगरपालिका में 600 स्थायी, 400 अस्थायी कर्मचारी

नगरपालिका परिषद-मुजफ्फरनगर में 600 से अधिक स्थायी कर्मचारी हैं। इनमें 150 लिपिक, माली, भिश्ती तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित 425 सफाई कर्मचारी हैं। ये सभी कर्मचारी स्थायी हैं, जबकि 242 सफाई कर्मचारी ठेके पर व 162 संविदा पर कार्यरत हैं। संविदा के 11 कर्मचारी पथ प्रकाश विभाग, 30 पेयजल तथा 12 कंप्यूटर पर कार्यरत हैं। सभी कर्मचारियों के वेतन तथा अन्य भत्तों पर नगरपालिका को शासन से मिलने वाली करीब 23 करोड़ की ग्रांट पर निर्भर रहना पड़ता है। शिकमी किरायदारी तय न होने से पालिका आय पर ब्रेक

शहर में नगरपालिका के स्वामित्व वाली 20 से अधिक मार्केट में 509 दुकानें हैं, जिन पर किराया निर्धारण वर्षो से नहीं हो पाया है। इन दुकानों में 155 दुकाने शिकमी किरायदारी की श्रेणी में आती है। शिकमी किराएदारी का मतलब है कि नगरपालिका से दुकान आवंटन किसी नाम पर है और उस पर कब्जा किसी और का है। ऐसे मामलों में दुकानदारों ने आपस में मोटा लेन-देन कर दुकानों का स्वामित्व एक-दूसरे को हस्तांतरण किया हुआ है, जबकि पालिका में वह पहले किराएदार के नाम पर ही दर्ज है। नगरपालिका ने ऐसे सभी दुकानदारों को नई दरों पर किराया तथा प्रीमियम जमा करने का नोटिस दिया हुआ है, लेकिन प्रस्ताव बोर्ड में स्वीकार होने के बावजूद शासन स्तर पर फाइल अटकी है। इसके चलते पालिका को 25 करोड़ की आय वृद्धि नहीं हो पा रही। 15 हजार से अधिक भवनों पर तय नहीं हुआ गृहकर

नगरपालिका क्षेत्र में 2016 में हुए सर्वे के मुताबिक 86 हजार आवासीय भवन हैं, जिनमें 25 हजार व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं, लेकिन 2016 के बाद से शहरी क्षेत्र में 15 हजार से अधिक आवासीय भवनों के निर्माण का आंकलन है, लेकिन सर्वे न होने के कारण इन भवनों पर आज तक गृहकर लागू नहीं किया जा सका।

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