मुजफ्फरनगर, जेएनएन। समाज कल्याण विभाग में नौ साल पहले हुए करोड़ों के घोटाले में बर्खास्त लिपिक अनिल वर्मा से 7.86 करोड़ रुपये की रिकवरी होगी। निदेशक समाज कल्याण ने इसके लिए डीएम को पत्र भेजा है। आरोपित लिपिक आठ माह पूर्व जनपद बिजनौर से बर्खास्त हुआ, लेकिन रिकवरी प्रक्रिया जनपद स्तर से होगी। इसकी मूल वजह यह है कि लिपिक ने जनपद में तैनाती के दौरान गबन किया और यहीं से जेल गया था।

वर्ष 2012 में तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह ने समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में करीब आठ करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा था। मामले में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी केएल गुप्ता और पटल प्रभारी लिपिक अनिल वर्मा सस्पेंड हुए थे। जांच में अनिल वर्मा दोषी पाया गया। अनिल वर्मा ने हस्ताक्षर से फर्जी तरीके से जिला समाज कल्याण अधिकारी के पदनाम से बैंक शाखाओं में कई खाते खोले और आठ करोड़ रुपये की धनराशि आहरित की। इस मामले में अनिल वर्मा के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था।

लिपिक को जेल भेजा गया था। इस मामले की जांच शासन स्तर से भी की गई। अनिल वर्मा मूल रूप से जनपद बिजनौर का है। तीन साल पूर्व वह बहाल हो गया लेकिन साठगांठ से गृह जनपद बिजनौर में समाज कल्याण कार्यालय में तैनाती पा ली।

जनवरी 2021 में अनिल वर्मा को घोटाले के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया। निदेशक समाज कल्याण ने डीएम चंद्र भूषण सिंह को पत्र भेजा है, जिसमें आरोपित पर दो मामले में क्रमश: 6.94 करोड़ रुपये और 92 लाख रुपये की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।

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निदेशक समाज कल्याण विभाग की ओर से डीएम के नाम पत्र प्राप्त हुआ है, जो समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में तैनात रहे लिपिक से रिकवरी के संबंध में है। रिकवरी जनपद स्तर से ही कराने के निर्देश है। समाज कल्याण विभाग में हुए करोड़ों के घोटाले में एक सप्ताह पूर्व एसआईटी के अधिकारी भी कार्यालय आकर मिले थे।

- संतोष कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी, मुजफ्फरनगर

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पूर्व में तैनात रहे लिपिक अनिल वर्मा के खिलाफ करीब आठ करोड़ रुपये की रिकवरी के आदेश हुए हैं। संबंधित फाइल ट्रेजरी आफिस में हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर रिकवरी प्रक्रिया शुरू होगी।

- जीआर प्रजापति, जिला समाज कल्याण अधिकारी

Edited By: Jagran