मुरादाबाद : मुहर्रम का चांद नजर आने के साथ ही जिक्रे हुसैन का सिलसिला शुरू हो गया। नूरिया सराय में शिया समुदाय के लोगों ने गमगीन माहौल में अलमों का मातमी जुलूस निकाल कर मातम व नोहेख्वानी की।

कर्बला में घटी भयंकर दुर्घटना की याद में हर साल मुहर्रम निकाले जाते हैं

माहे मुहर्रम मे मानव इतिहास की कर्बला में घटी भयंकर दुर्घटना की याद में हर साल मुहर्रम निकाले जाते है। सम्भल की करीबी बस्ती नूरियो सराय में शिया समुदाय के लोगों ने मुहर्रम का चांद देखकर इमामबाड़ा में मजलिसों का सिलसिला शुरू कर दिया।

अलमों का मातमी जुलूस बरामद

इमामबाड़ा फरमान हुसैन से अलमों का मातमी जुलूस बरामद किया गया। गमजदा अजादारों ने मातम किया और कर्बला के शहीदों की याद में नम आंखों के साथ नोहेख्वानी बरपा की महिलाओं ने घरों में मातम किया। इमाम बाड़ों व घरों में शोक के प्रतीक काले परचम लगा दिये गये। 68 दिनों तक जारी रहने वाले शोक के दौरान मजालिसों मातम जुलूसों के सिलसिले के दौरान शिया समाज के लोगों में खुशी का कोई कार्यक्रम नही होता है।

चांद न•ार आते ही अजादारी का सिलसिला शुरू

सम्भल के सिरसी में मुहर्रम का चांद मंगलवार को दिखाई दे गया। इसी के साथ अशरा-ए-मुहर्रम की मजलिसों का सिलसिला बुधवार पहली मुहर्रम से शुरू हुआ, जो यौमे आशूरातक जारी रहेगा। चांद रात को अजाखानो को सजाकर नजर के बाद मातम व नोहा ख्वानी की गई।

सवा दो माह तक अजादारी के साथ शोक मनाने की अवधि भी शुरू

मुहर्रम का चांद न•ार आते ही शिया समुदाय में नवासाये रसूल हजरत इमाम हुसैन और सभी शहीदाने कर्बला की याद में सवा दो माह तक अजादारी के साथ शोक मनाने की अवधि भी शुरू हो गई। मोहर्रम का चांद न•ार आते ही शिया महिलाओं ने अपने आभूषण व चूड़ियां उतारकर गम के प्रतीक काले कपड़े पहन लिए। इस समुदाय में सवा दो माह तक के लिये खुशी के सभी कार्यक्रम भी स्थगित रहेंगे।

काले अलम लगाकर मातम व नोहा ख्वानी की

मंगलवार को मुहर्रम का चांद दिखाई देते ही इमाम बारगाहो व अजाखानों में ताजिये रखकर काले अलम लगाकर मातम व नोहा ख्वानी की गई। शुक्रवार से रात-दिन मजलिस मातम व जुलूसों के निकलने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। मुहर्रम मनाने बाहर के नगरो व विदेश में रहने वाले लोगो के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। अजादारों ने नगर पंचायत से बेहतर सफाई व्यवस्था व विद्युत विभाग से मुहर्रम में कटौती मुक्त बिजली देने की मांग की। लोगो का कहना हैं कि मुहर्रम में सिरसी में देर रात तक मजलिस मातम और जुलूसों का सिलसिला जारी रहता है।

Posted By: Jagran