मुरादाबाद

फुटबाल के सबसे बड़े महाकुंभ फीफा व‌र्ल्डकप का आगाज हो चुका है। विश्व के दिग्गज फुटबाल खिलाड़ी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। खिलाड़ियों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। इन सब के बीच हम आपको ऐसी शख्सियत के बारे में बताते हैं जिनके नाम से मुरादाबाद में फुटबाल जाना हैं। फुटबाल का नाम आते ही उनके चर्चे शुरू हो जाते हैं। भारतीय रेल में सेवा के साथ साथ उन्होंने मंडल में फुटबाल खिलाडि़यों की नई पौध सृजित की। ब्राजील के मशहूर फुटबालर पेले की ड्रिबलिंग की तरह उनकी भी ड्रिबलिंग थी। उनकी ड्रिबलिंग का कोई सानी नहीं था। इसके चलते उन्हें पेले के रूप में प्रसिद्धि मिली। ऐसे शख्स का नाम है स्वर्गीय अब्दुल रहमान 'पेले'। अब उनके बेटे भी उन्हीं की राह पर चल रहे हैं।

-------------

भारतीय रेलवे टीम का किया नेतृत्व

-अब्दुल रहमान 'पेले' भारतीय रेल में लोको पायलट थे। बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्हें भारतीय रेलवे फुटबाल टीम की नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली। पहली बार उन्होंने सन् 1971 में गोरखपुर में आयोजित प्रतियोगिता में भारतीय रेलवे टीम का नेतृत्व किया। यूपी फुटबाल टीम में खेले। उनके साथ खेलने वाले उन्हें उस्ताद के नाम से पुकारते थे। फुटबाल खिलाड़ियों का कहना है कि मंडल में फुटबाल खिलाड़ियों की पौध सृजित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है।

--------------

आसानी से मारते थे गोल

-ड्रिबलिंग का मतलब बॉल का पैर से चिपके रहना है। अब्दुल रहमान जब खेलते थे तो विरोधी टीम के खिलाड़ियो में किसी की हिम्मत नहीं थी कि उनके पास गेंद जाने के बाद छीन सके। बेहतरीन ड्रिबलिंग की बदौलत वह आसानी से 11 खिलाड़ियों को भेदकर शानदार तरीके से गोल दागते थे। विरोधी भी उनके आगे पस्त नजर आते थे।

------------

बेटे भी पिता की राह पर

-अब्दुल रहमान के तीन बेटे हैं। बेटे भी रेलवे में तैनात हैं और फुटबाल के ही खिलाड़ी हैं। दूसरे नंबर का बेटा तसलीम अहमद भी रेलवे में मुख्य हित निरीक्षक के पद पर तैनात है। वह रेलवे के डिवीजनल टीम के कोच भी है। तीसरे नंबर के बेटे अब्दुल नईम कटघर रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के पद पर तैनात हैं। अब्दुल नईम भी रेलवे की टीम का राज्य स्तर पर नेतृत्व कर चुके हैं।

By Jagran