मुरादाबाद :

मौसम की मार से किसान सबसे ज्यादा हताहत होता है। देश के अलग-अलग राज्यों में पारंपरिक खेती का चलन है। बदलते दौर के साथ ही खेती करने का सलीका भी बदल रहा है। सरकार भी किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन करने का सुझाव दे रही है। ऐसे में किसानों के लिए फसलों के साथ ही औषधीय और फूलों की खेती करने से अधिक फायदा हो सकता है। ऐसे ही हैं शहर के कारोबारी रवीन्द्र गोयल, जिन्होंने दो साल पहले फूलों के साथ ही औषधीय खेती में हाथ आजमाना शुरू किया था। कारोबार की व्यस्तता के बाद भी उन्होंने अपना रुख बदलते हुए खेती करने का फैसला किया था। अपने इस फैसले में वह कामयाब भी रहे। उनके इस प्रयोग से अच्छे उत्पादन के साथ आमदनी भी हो रही है। कृषि क्षेत्र में वह किसानों को भी इस नए प्रयोग के साथ ही सफलता का मंत्र देने में जुटे हुए हैं।

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32 बीघा खेती में की शुरुआत

फूलों और औषधीय खेती की जनपद में शुरुआत करने वाले रवीन्द्र गोयल ने बताया कि साल 2016 में उन्होंने सबसे पहले फूलों की खेती की थी। इसके बाद वह औषधीय खेती भी करने लगे। मौजूदा समय में वह करीब 32 बीघे में गुलाब, लिली, लेमन ग्रास के साथ ही गिलोय, एलोवीरा और मसालों में हल्दी उगाने का काम कर रहे हैं। उनकी यह नई पहल लोगों को प्रेरणा देने का काम कर रही है।

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कोलकता से सीखा फूलों की खेती का गुर

फूलों की खेती के मामले में कोलकता सबसे बेहतर है। रवीन्द्र बताते हैं कि फूलों की खेती सीखने के लिए वह कोलकता गए थे। वहां से सभी जानकारी लेने के बाद उन्होंने इसकी शुरुआत मुरादाबाद में की थी। आज उनके उगाए फूल दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तक जा रहे हैं।

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तीन लाख लगाकर 50 हजार रु. कमा रहे प्रतिमाह

रवीन्द्र बताते हैं कि दो साल पहले उन्होंने करीब तीन लाख रुपये लगाकर फूलों और औषधीय खेती की शुरुआत की थी। मौजूदा समय में मसालों में हल्दी की फसल भी इस साल बोई है। इन सभी फसलों की उपज से प्रतिमाह करीब 50 हजार रुपये की कमाई शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि अभी काम धीरे-धीरे बढ़ रहा है। उन्होंने आगे प्रतिमाह कमाई का लक्ष्य दो से ढाई लाख रुपये तक पहुंचाने का रखा है।

By Jagran