जागरण संवाददाता, मुरादाबाद : प्रदूषण का स्तर अचानक से चार सौ के पार चला गया है। चारों ओर धूल की परत बनी हुई है। अभी तक स्पष्ट रूप से प्रदूषण बढ़ने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसे केवल जलवायु में परिर्वतन और बलूचिस्तान से चली धूल भरी हवाओं को माना जा रहा है। सबसे बड़ी खास बात यह है कि मुरादाबाद में बुधवार और गुरुवार दोनों दिन हवाएं नहीं चलीं। ऐसे में जो धुंध में धूल और अन्य कण स्थानीय स्तर से उठें हैं। इनके लिए मुरादाबाद में प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियां ही जिम्मेदार हैं। यू ही नहीं पहुंचे धूल के कण हवा में

-धुंध के कारण वायुमंडल में एक परत जम गई है। हालांकि मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं दे पा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार हवा का कम दबाव वाला क्षेत्र इसका कारण है। वाहनों से होने वाला प्रदूषण

-मुरादाबाद में हर दिन वाहनों से निकलने वाला धुआं परेशानी का सबब बना हुआ है। हवा से नमी खत्म होते ही धूल और धुएं के कण वायुमंडल में तैरने लगे और धुंध का रूप ले लिया। इसके लिए निर्धारित समय सीमा पार कर चुके वाहनों को बंद करा देना चाहिए। साथ ही सीएनजी और ई-रिक्शा जैसे वाहनों को बढ़ावा मिलना चाहिए। ई-कचरा जलाने से जहरीली हो रही हवा

-ई-कचरा जलाने के मामले में मुरादाबाद की छवि बेहद खराब है। यहां प्रदेश में सर्वाधिक ई-कचरा जलाया जाता है। ई-कचरा जलाए जाने से वायुमंडल धुएं के साथ प्लास्टिक व अन्य धातुओं के महीन कण जमा होने लगते हैं। ठंड के दिनों में नमी होने के कारण वह नीचे आ जाते है, लेकिन गर्मियों यह ऊपर ही रहते हैं। धूल के साथ मिलकर उन्होंने एक परत बना ली है। वहीं गलियों में चलने वाली भट्टियों से निकल रहा धुआं भी खतरनाक साबित हो रहा है। इनको हटाने के आदेश है, इसके बावजूद चोरी छिपे चलने वाली भट्टिया भी प्रदूषण का स्तर बढ़ाया है। पीएम-2.5 का मापन नहीं

महानगर में कई स्थानों पर हवा की गुणवत्ता नापने के लिए उपकरण लगाए गए हैं। यह उपकरण पीएम-10 तक महीन कणों का मापन कर सकते हैं। जबकि धूल आदि में पीमए-2.5 तक महीन कण होते हैं। इनका मापन मुरादाबाद में नहीं होता। इसके कारण हवा में उनकी मात्रा पता ही नहीं चलती। मास्क की बड़ी बिक्री

धुंध स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इससे सांस लेना भी दूभर हो गया। ऐसे में लोगों ने बचाव के लिए मास्क का प्रयोग किया। मेडिकल सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट विक्रेता राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि मेडिकल में प्रयोग होने वाले मास्क की सेल सर्वाधिक बढ़ी है।

मास्क का प्रकार कीमत

कपड़े वाला मास्क - बीस रुपये

डिस्पोजल ग्रीन - पांच रुपये

एन-95 - 150 रुपये

थ्री एम - 120 रुपये मुरादाबाद में एक ही दिन में बढ़ा ्रप्रदूषण का स्तर

धुंध वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है। पंर्टिकुलेट मैटर (पीएम)-10 गुरुवार को 360 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका सामान्य स्तर पर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है। घर में रहे और खिड़की दरवाजे रखें बंद

मौसम विशेषज्ञों ने ऐसे हालात में बुजुगरें, महिलाओं और बच्चों को घर के भीतर ही रहने की सलाह दी है। घर व दफ्तर की खिड़किया-दरवाजे बंद रखने को कहा है। साथ ही कचरा न जलाने की सलाह दी है। इस दौरान निर्माण कार्य भी बंद रखने की भी बात कही है।

सस्ते और सर्जिकल मास्क से नहीं मिलेगी राहत

मौजूदा स्थिति में सस्ते और सर्जिकल मास्क से राहत नहीं मिलेगी। ऐसे मास्क खरीदने की जरूरत है जिसमें कार्बन फिल्टर लेयर हो और चेहरा अच्छे से ढक सके। सर्जिकल सामान के विक्रेता राजकुमार सिंह की माने तो कार्बन फिल्टर लेयर के मास्क बहुत ही कम लोग मांगते हैं। सड़क किनारे बिकने वाले मास्क से धूल और प्रदूषण नहीं बचता है।

जाम लगने से वाहनों से निकलता है ज्यादा धुंआ

जाम लगने के कारण वाहनों की गति कम होने के कारण उससे ज्यादा धुआ निकलता है जिससे प्रदूषण ज्यादा फैलता है। रिसर्च स्कॉलर रैना की माने तो वाहनों से निकलने वाला कार्बन और धूल पीएम 2.5 और पीएम 10 को बढ़ाते हैं। यही प्रदूषण के बड़े वाहक हैं।

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शरीर के अंगों पर इस तरह प्रभाव डालता है प्रदूषण

पीएम 2.5 गले में पहुंच जाए, तो सास लेने में दिक्कत आने के साथ-साथ खासी भी हो सकती है। यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है जिससे ब्रोंकाइटिस का दौरा पड़ने का भी खतरा रहता है। प्रदूषण की वजह से प्रतिरोधी क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। इस कारण मरीज बार-बार बीमार हो सकता है। वह जल्दी ठीक नहीं हो पाता, दवा का असर कम होता है और संक्रमण की आशका बनी रहती है। शरीर के अंदरूनी हिस्से के साथ-साथ बाहरी हिस्से प्रभावित होते हैं। इन दिनों में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि यह सास के जरिये शरीर के अंदर पहुंच रहा है।

धुंध से सांस लेना मुश्किल हो गया है। बाहर निकलने पर ऐसा लगता है जैसे आक्सीजन नहीं हो।

चिंतामणि शर्मा

दो दिन से छाई धुंध के हर तरफ धूल ही धूल है। इसके महीन कण घरों तक में घुस रहे हैं। इससे बीमारियां बनेंगी।

राम सिंह धुंध छाने से घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। धूल के कारण सुबह में भी सांस लेने में दिक्कत हुई।

अशोक विद्रोही

प्रदूषण के लिए हम सब जिम्मेदार हैं। इससे बचाव के लिए प्रशासन को प्रयास करने चाहिए।

राजीव प्रखर

Posted By: Jagran