जागरण संवाददाता, मुरादाबाद :

भारत से हस्तशिल्प आइटम निर्यात में कई वस्तुएं ऐसी हैं जिनको लेकर हमेशा संदेह की स्थिति बनी रहती है। देश भर के बंदरगाहों से सींग, अस्थि, सीप, चमड़ा हस्तशिल्प, पारंपरिक आर्टवेयर उत्पादों की निकासी के दौरान कई बार समस्याएं खड़ी हो जाती है। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि ईपीसीएच द्वारा उठायी गई चिंताओं को हल करने के लिए केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड सीबीईसी आयुक्त एकल खिड़की प्रणाली ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक बैठक बुलाई। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग वन विभाग और सीमा शुल्क के अधिकारी शामिल थे। बताया कि केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड सीबीईसी आयुक्त एकल खिड़की प्रणाली ने कहा कि हस्तशिल्प एक रोजगार सृजन का क्षेत्र है। इससे छोटे कारीगर जुड़े हैं और इस तथ्य को स्वीकार किया कि सींग, अस्थि, सीप, चमड़ा हस्तशिल्प, पारंपरिक आर्टवेयर उत्पादों के शिपमेंट की निकासी बिना विलम्ब होनी चाहिए। कहा उन खास मामलों को जहा निर्यात के लिए भेजा गया माल रोका गया है, वहां से तत्काल उनकी सूचना दी जानी चाहिए। इससे बंदरगाहों पर दिक्कतों को दूर किया जा सके। इसके साथ ही यह निर्णय भी लिया गया कि दिल्ली और अन्य शिल्प समूहों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि निर्यातकों को सींग, अस्थि, सीप, चमड़ा और पारंपरिक आर्टवेयर उत्पादों से जुड़े मुद्दों पर शिक्षित किया जा सके।

Posted By: Jagran

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