मुरादाबाद

हवा में धूल अधिक होने से लोगों की सांस तेज चलनी शुरू हो गई है। इससे पीड़ित इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सक एलर्जी व सांस के रोगियों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। मुरादाबाद सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल है। हवा में धूल की परत छाने से सांस के साथ उसके कण फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। दमा व सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए नई समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे सबसे अधिक बच्चे प्रभावित हैं।

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चिकित्सकों की राय

-दो दिन से हवा में धूल अधिक होने से सांस की बीमारी से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ गई है। इसमें बच्चों की संख्या भी काफी अधिक है। गुरुवार को सौ से अधिक रोगी सांस तेज चलने की समस्या को लेकर इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे।

-डॉ. राजेंद्र कुमार,चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल मुरादाबाद सांस के साथ धूल के महीन कण फेफड़े में जा रहे हैं। सांस संबंधी बीमारी है या टीवी से पीड़ित रोगी हैं, उसकी सांस तेज चलने लगती है। दमा से पीड़ित व्यक्ति सबसे अधिक परेशानी होती है। प्रदूषण के कारण ऐसे रोगियों की संख्या बढ़ गई है। दवा के साथ ही घर से बाहर नहीं निकले की सलाह दी जा रही है।

-डॉ. नितिन बत्रा

वरिष्ठ चेस्ट रोग विशेषज्ञ प्रदूषण भरी हवा से बचने के बारे में रोगियों को जानकारी दी जा रही है। मास्क या चेहरे पर रूमाल बांध कर घर से बाहर निकलें। जिन्हें एलर्जी व सांस से संबंधित बीमारी है, उन्हें नियमित दवा लेने की सलाह दी जा रही है।

-डॉ. राकेश कुमार

वरिष्ठ फिजिशियन दूषित हवा के कारण छोटे बच्चों की सांस तेज चलनी शुरू हो जाती है। माता-पिता को सलाह दी जाती है, वह छोटे बच्चों को घर से निकलने नहीं दें। घर से निकले पर बच्चों के मास्क अवश्य पहनाएं।

-डॉ. शलभ अग्रवाल

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ।

By Jagran