मुरादाबाद : अमरोहा जनपद की औद्योगिक नगरी गजरौला में नेशनल हाईवे स्थित चौपला चौकी के पास से ही उचक्के ने रोडवेज बस में सवार हो रहे हापुड़ के एक ठेकेदार की पेंट की जेब में हाथ डालकर दो हजार रुपये के नोट वाली गड्डी यानी दो लाख रुपये साफ कर दिए। ठेकेदार को इसका पता लगते ही वह यात्रियों की भीड़ में उसे ताकता रह गया, लेकिन उचक्का दिखाई नहीं पड़ा। सुबह करीब साढ़े दस बजे हुई इस घटना से क्षेत्र में खलबली मच गई। इसके बाद पहुंची पुलिस ने क्षेत्र में चे¨कग व बैंक के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी, लेकिन बदमाश का कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मकान बनवाने को दामाद से लिए दो लाख

हापुड़ में मेरठ रोड स्थित 95, संजय विहार आवास विकास कॉलोनी निवासी खजान ¨सह का 50 वर्षीय पुत्र श्योराज ¨सह ठेकेदार है। वहां उसका मकान बन रहा है। उसके लिए जुबिलेंट फैक्ट्री में अधिकारी के पद पर तैनात दामाद सतेंद्र ¨सह से दो लाख रुपये लेने आया था। यह रकम उसे सतेंद्र ¨सह ने हाईवे किनारे स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से सुबह निकलवा कर दी थी। दो-दो हजार के सौ नोट वाली दो लाख रुपये की यह गड्डी वह पेंट की आगे वाली जेब में रखकर ई रिक्शा में बैठ कर चल दिया। चौपला पर करीब 5 मिनट के इंतजार के बाद वह हापुड़ जाने के लिए हसनपुर की ओर से आइ रोडवेज बस में चढ़ा तो पीछे से भीड़ के बीच से किसी ने उसकी जेब में हाथ डाल कर दो लाख रुपये की गड्डी साफ कर दी।

आभास होते ही ठेकेदार ने मचाया शोर

इसका आभास होने पर वह शोर मचाता हुआ भीड़ को चीरकर बस से नीचे उतरा तब तक उचक्का साफ हो चुका था। इसके बाद शोर मचते ही भीड़ जुट गई। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में चे¨कग की। पुलिस ने स्टेट बैंक की सीसीटीवी फुटेज का भी जायजा लिया, लेकिन बदमाश का कोई सुराग नहीं लगा। बाद में ठेकेदार के दामाद से तहरीर लिखवाकर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक अशोक शर्मा ने बताया उचक्के को तलाश किया जा रहा है। मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। - घटना सही व गलत होने की करती रही पुलिस पड़ताल

गजरौला की चौपला पुलिस चौकी के सामने भले ही इस तरह यात्रियों की जेब से रकम साफ होने, पर्स साफ होने, गले से सोने की चेन और कानों से कुंडल साफ होने की तमाम घटनाएं पूर्व में हो चुकी हों, लेकिन 100 नंबर डायल नहीं होने पर दो लाख रुपये जेब से निकलने का शिकार ठेकेदार श्योराज जब ठीक सामने स्थित चौकी में पहुंचा तो पुलिस उचक्के की पड़ताल में जुटने की बजाय पीडित को ही संदेह की ²ष्टि से देखने लगी। उसे यह यकीन नहीं हो रहा कि वास्तव में उसके साथ घटना हुई है। घटना को संदेह से देखते हुए पहले चौकी इंचार्ज ने काफी देर पूछताछ की। उसके बाद एसएसआइ ने उससे जानकारी ली। बाद में उचक्के की तलाश शुरू की, फिर उसके हाथ आने की कल्पना करना ही व्यर्थ है। ठेकेदार का कहना है कि यदि पुलिस उसके सूचना देते ही संबंधित रोडवेज व चौपला को घेर कर तलाशी कराती तो उचक्का रकम समेत पकड़ा भी जा सकता था।

Posted By: Jagran

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