मुरादाबाद(प्रदीप चौरसिया) : उत्तर रेलवे मुख्यालय गाजियाबाद से मुरादाबाद होकर लखनऊ रेल मार्ग को प्रमुख रेल मार्ग बनाने की तैयारी में है। इसमें सबसे बड़ी समस्या मुरादाबाद से रोजा तक रेल मार्ग की है। क्योंकि मुरादाबाद से रोजा तक मुरादाबाद में दिल्ली रेल मार्ग के अलावा सहारनपुर, रामनगर, अलीगढ़ मार्ग आकर मिलते है। रामपुर में काठगोदाम, बरेली में लालकुआं, पीलीभीत, कासगंज, रोजा में सीतापुर, उन्नाव के लिए टे्रनें जाती हैं। इन मार्गों से आने वाली ट्रेन व मालगाड़ी के लिए रोजा से मुरादाबाद के बीच दो रेल लाइन ही हैं। निर्धारित समय पर चलने वाली ट्रेनें मुरादाबाद- रोजा के बीच फंस जाती हैं। कई घंटे लेट हो जाती हैं। देख जाए तो रामपुर से मुरादाबाद के बीच सबसे अधिक ट्रेनें फंसती हैं। रेल प्रशासन ने इसके स्थायी समाधान के लिए मुरादाबाद से रोजा तक 163 किलो मीटर लंबे फोर लेनरेल मार्ग का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा है। एक किलोमीटर के निर्माण पर दो करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इस मार्ग को पूरा करने में पांच साल से अधिक समय लग सकता है। तत्काल समस्या के समाधान के लिए दो स्टेशनों के बीच आधुनिक सिग्नल सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे अगले स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने से पहले ही दूसरी ट्रेन को चलाया जा सकता है। मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश ने बताया कि गाजियाबाद से लखनऊ तक 130 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रेन चलाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसमें दो साल का समय लग सकता है।

  

Posted By: Narendra Kumar

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