मुरादाबाद, जेएनएन। दुनिया के हर कोने में भारतीय खिलाड़ी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। ओलंपिक, राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों सहित अन्य प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाडिय़ों का डंका बज रहा है। इसके बावजूद देश के ज्यादातर हिस्सों में खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। संसाधनों के अभाव में प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। मुरादाबाद मंडल में अपार प्रतिभाएं होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर चमक फीकी ही बनी हुई है। मंडल में खेलों के माहौल, बुनियादी सुविधाओं, नियमित कोचों की भर्ती, नई सुविधाओं और नए संकल्प को लेकर क्रीड़ा अधिकारी अनिमेष सक्सेना से हमारे संवाददाता रवि प्रकाश सिंह रैकवार ने विशेष बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश : 

सवाल: खेलों के लिहाज से वर्ष 2019 में आपके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही। 

जवाब: खेलो इंडिया में स्टेडियम के कई बच्चों ने दमदार प्रदर्शन किया। हॉकी और जूडो के दो-दो खिलाडिय़ों ने इसमें पदक जीता। यूरोप में हुई कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भी यहां के खिलाडिय़ों ने अपनी झोली में पदक डाला। बैडमिंटन की कई राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में शटलरों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर बड़ी उम्मीद जगाई है। 

प्रश्न: स्टेडियम में सभी खेलों के नियमित कोच नहीं हैं, ऐसे में खेलों के विकास लेकर खेल विभाग का दावा हवा- हवाई ही लग रहा है। 

जवाब: अभी भले ही स्टेडियम में सिर्फ चार खेलों के ही नियमित कोच हैं। आने वाले समय में नियमित कोचों की संख्या में इजाफा होगा। कम नियमित कोचों के बावजूद सभी खेलों का अभ्यास यहां खिलाड़ी बिना किसी परेशानी के कर रहे हैं। पिछले साल ग्यारह नियमित कोच स्टेडियम में थे। 

सवाल: मंडल के क्रिकेटर यूपी टीम को लगातार मजबूती दे रहे हैं। यह बड़ी उपलब्धि है लेकिन, ज्यादातर क्रिकेटर निजी कोचिंग से ही निकल रहे हैं।

जवाब: एक साथ इतने खिलाडिय़ों का रणजी में चयन होना गर्व की बात है। जिन खिलाडिय़ों का चयन यूपी की विभिन्न आयुवर्ग की टीम में हुआ है वे स्टेडियम में भी कभी-कभी अभ्यास करने के लिए आते रहे हैं। स्टेडियम के कई क्रिकेटर हैं जो जल्द ही यूपी टीम में शामिल होंगे। इस साल कम से कम एक नियमित क्रिकेट कोच रखा जाएगा ताकि क्रिकेट का माहौल और बेहतर हो। 

सवाल:  इसी साल ओलंपिक है,लेकिन मंडल का कोई भी ऐसा खिलाड़ी नहीं है जो हाल फिलहाल भारतीय दल का हिस्सा बन सका हो। इस दयनीय स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है। 

जवाब: मंडल में स्टेडियम का अभाव है। कम से कम तीन स्टेडियम होने चाहिए। सोनकपुर स्टेडियम भी काफी छोटा है। रामपुर में हॉकी का ऐसा स्टेडियम बनाया गया है जहां बड़े मुकाबले कराए जा सकते है। ओलंपिक बड़ी प्रतियोगिता है, प्रतिस्पर्धा बहुत तगड़ी है। आने वाले समय में मंडल से भी ओलंपिक के खिलाड़ी न सिर्फ निकलेंगे, बल्कि पदक भी जीतेंगे। 

सवाल: रामपुर  का एस्ट्रोटर्फ मेजबानी के अभाव में शोपीस बनकर रह गया है। क्या इस साल इस पर हॉकी का कोई बड़ा टूर्नामेंट हो सकता है।

जवाब:  खेल विभाग के साथ हॉकी इंडिया के पास आयोजन को लेकर बेहतर प्लान होगा। अभी किसी बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी को लेकर कोई सूचना नहीं है। मेजबानी मिलती है तो यहां सबसे सफल आयोजन होगा।

सवाल: इस साल स्टेडियम में क्या-क्या सुविधाएं बढ़ेंगी। 

जवाब: इसी हफ्ते जिम को आमजन के लिए भी खोल दिया जाएगा। इसके अलावा साल के अंत तक शहरवासियों को टेबल टेनिस हॉल की भी सौगात मिलेगी। 

 

Posted By: Narendra Kumar

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