दुबई (संजय मिश्र)। यूएई का अमीरात दुबई सिर्फ चमकती गगनचुम्भी इमारतों का शहर नहीं है बल्कि अपने नागरिक जीवन को व्यवस्थित बनाने में अभिनव प्रयोगों के कारण भी यह दुनिया का ध्यान खींच रहा है। बात चाहे स्वच्छता की हो या यातायात नियंत्रण व्यवस्था की, दुबई एक मिसाल की तरह है। हाल के दिनों में नारी सशक्तीकरण की दिशा में कदम बढ़ाकर इसने संकेत दिया है कि वह देर-सबेर एक-एक कर रूढ़ मान्यताओं से मुक्ति का मार्ग खोलेगा। शानदार जीवन शैली और रोजगार के अवसर की प्रचुरता भी इसके प्रति लोगों का ध्यान खींचती है। 

भारत-पाक में मिट जाता है भेद 

फुजैरा, शारजाह, दुबई और अबू धाबी में भारत और पाकिस्तान का भेद मिट जाता है। श्रमिकों की बड़ी खेप यहां देशों के बीच कूटनीतिक चर्चाओं से दूर जमकर भाईचारा निभाती है। फुजैरा के होटल में बिहार के अंकित और कराची के सलमान साथ साथ काम करते हैं और दोस्त की तरह रहते हैं। इन दो देशों के सबसे अधिक लोग तो यहां रोजगार पा ही रहे हैं, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका के अलावा युद्धग्रस्त सीरिया, जॉर्डन, ब्राजील के नागरिक भी बड़ी संख्या में यहां की रौनक बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इनमें भी सर्वाधिक संख्या भारतीयों की ही है। फुजैरा के वित्त विभाग के निदेशक कहते हैं कि यूएई का वातावरण भारत जैसा ही है, क्योंकि यहां बाहर से आए लोगों में 60 फीसद भारतीय ही हैं। भारतीय कौशल की प्रशंसा करते हुए वह फख्र से बताते हैं कि फुजैरा में तो बाहर से आए लोगों में भारतीय की संख्या 90 फीसद तक है। वह भारत और यूएई के संबंधों की मजबूती का प्रमुख कारण दोनों देशों की सरकारों के बीच की बेहतर समझदारी को बताते हैं। 

शानदार यातायात व्यवस्था को कड़ाई से पालन 

बाहर से आने वालों के लिए यूएई कई कारणों से आकर्षित करता है। भारत के शहरों में लोग ट्रैफिक नियम तोडऩे में शान समझते हैं, लेकिन यूएई में ऐसा करना मुमकिन ही नहीं है। फुजैरा से लेकर शारजाह और दुबई तक की सड़क यात्रा में कहीं भी यातायात व्यवस्था लडख़ड़ाती नजर नहीं आई। सड़क पर कोई ट्रैफिक का आदमी खड़ा नहीं दिखा, लेकिन ट्रैफिक रेगुलेट होता रहा। फुजैरा की सड़कों पर तो भीड़ थोड़ी कम थी, लेकिन दुबई में ट्रैफिक का दबाव अधिक था और गति भी तेज थी। इसके बावजूद सिगनल का उल्लंघन करने की हिम्मत किसी में नहीं दिखी।

सख्ती से होता है नियमों का पालन 

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन की सख्ती है। इस सख्ती ने पूरे यूएई को गजब का ट्रैफिक संस्कार दिया है। दुबई में बचपन से ही रह रहे यज्ञेश बताते हैं कि कोई भी व्यवस्था तभी लडख़ड़ाती है जब उसे संभालने वाले सुस्त हो जाते हैं। यूएई में ऐसा कहीं नहीं मिलेगा, क्योंकि नियमों और प्रशासन की सख्ती ने सिस्टम का पालन करने का संस्कार भरा है। यहां पिछले 20 साल से अपनी कम्पनी चला रहे मुरादाबाद के विकास अग्रवाल कहते हैं, चाहे आप कोई हों ट्रैफिक नियम तोडऩे पर वही सजा मिलेगी जो निर्धारित होगी। सिंगल का उल्लंघन करने पर सजा के तौर पर आठ सौ से अधिक दिरहम चुकाने पड़ते हैं। इसके अलावा वाहन 15 दिन तक सीज हो सकता है और गलती की प्रकृति के अनुरूप ड्राइविंग लाइसेंस में ब्लैक स्टार्स दर्ज कर दिए जाते हैं। डेढ़ दशक से दुबई में रह रहे बस्ती के सैय्यद मजहर हुसैन बताते हैं कि छोटा हो या बड़ा सबके लिए यातायात नियमों का पालन करने की अनिवार्यता है। पुलिस सड़कों पर भले ही न दिखे, लेकिन आपने जैसे ही नियम तोड़ा सजा जरूर मिलेगी।

Posted By: Rashid

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