मुरादाबाद : साढ़े पांच महीने पहले घर में हुए हेड कांस्टेबल कविता चौधरी हत्याकांड की गुत्थी लगभग सुलझ गई। पुलिस को मिले सारे सुबूत हत्या की ओर ही इशारा कर रहे हैं, लेकिन विवेचना के दौरान जो नाम प्रकाश में आए उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। कविता के पिता धर्मïïवीर सिंह सीओ सिविल लाइंस एएसपी आदित्य लांग्हे से मिले तो फफक पड़े। बुधवार को कविता के पिता धर्मवीर सिंह एएसपी सिविल लाइंस आदित्य लांग्हे से मिले। बताया छह माह बीतने के बाद भी हत्यारोपी वर्दीधारी खुलेआम घूम रहे हैं। तीन विवेचक बदल चुके हैं। इन हालातों में मामले की जांच किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। एएसपी ने धर्मवीर सिंह ने धर्मवीर की बात सुनी। पूरे मामले की जानकारी कराकर कहा जल्द न्याय दिलाया जाएगा। 

भाई की तहरीर पर हुआ पति और परिजनों के खिलाफ मुकदमा 

मूलरूप से बिजनौर के थाना चांदपुर के ग्राम बसेड़ा निवासी हेड कांस्टेबल कविता चौधरी की शादी दारोगा प्रमोद कुमार चौधरी से हुई थी। दो बच्चे मेरठ में रहते हैं। कविता यहां थाना पाकबड़ा में तैनात थीं। बुद्धि विहार में वह रहती थीं। एक अप्रैल को उनकी घर में हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम में बिसरा सुरक्षित रखा गया। लखनऊ की फोरेंसिक टीम ने भी जांच पड़ताल की। कविता के भाई की तहरीर पर पुलिस ने कविता के पति दारोगा प्रमोद चौधरी, देवर मनोज कुमार व बहनोई पंकज कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। 

संघर्ष के निशान बता रहे थे हत्या की कहानी

 हेड कांस्टेबल कविता की मौत को हत्या मानने में साढ़े पांच महीने लग गए। पुलिस सूत्रों की माने तो क्राइम सीन देखकर ही हत्या की बात साफ हो रही थी।कविता के हाथ-पैर और चेहरे पर चोटों के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि हुई थी। इससे जाहिर हो रहा था कि मरने से पहले कविता का हत्यारोपितों से संघर्ष हुआ।

Posted By: Narendra Kumar

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस