मुरादाबाद, जेएनएन। समय के साथ तकनीक इस कदर विकसित हो रही है कि जो काम दस साल पहले असंभव सा लगता था अब वह चुटकियों को हो रहा है। यह विकास हर क्षेत्र में हुआ है। रेलवे भी इस तकनीकी विकास से अछूता नहीं है। पहले रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण के लिए महीनों ट्रेनों का आवागमन बाधित होता था लेकिन, अब ऐसा नहीं है। अब दौड़ती ट्रेनों के ऊपर पुल बना दिए जाते हैं। कुछ ऐसा ही होने जा रहा है मुरादाबाद के बहुप्रतीक्षित लोकोशेड पुल निर्माण के लिए।

लोकोशेड पुल के लिए ट्रेनों के पहिए नहीं थमेंगे। रेल लाइन के ऊपर पुल का गार्डर रख दिया जाएगा और डीजल इंजन से ट्रेनों  का संचालन जारी रहेगा। बीस दिसंबर की रात में गार्डर रखा जाएगा। शनिवार को गार्डर की दूसरी खेप यहां आने के बाद निर्माण और इंजीनियङ्क्षरग विभाग के अफसर इस कसरत में जुट गए कि पुल समय से तैयार हो जाए। 

दो खेप में डेढ़ टन गार्डर पहुंच गया है। लोकोशेड पुल निर्माण के लिए जीएम के हस्तक्षेप के बाद काम में तेजी आ गई है। गार्डर की दूसरी खेप मौके पर पहुंच गई। आज देर रात मुख्य बेस के दो टुकड़े आ जाएंगे। निर्माण विभाग का कहना है कि चार-चार घंटे में यह काम पूरा होना है। बीस दिसंबर की रात में यह काम प्रस्तावित है। इस दौरान केवल रोड यातायात रोका जाएगा। ट्रेनों के संचालन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। 

केवल रेल लाइन के ऊपर गार्डर रखने के दौरान बिजली की आपूर्ति बंद की जाएगी। तीस से पैंतीस मिनट में गार्डर का ढांचा तैयार हो जाएगा। दो हिस्से में यह काम होगा। यानी दो रात के प्रयास में यह काम हो जाएगा। 

गाजियाबाद से आएगी कारखाना की टीम

पुल के गार्डर सेट करने गाजियाबाद से टीम आएगी। यह टीम गार्डर बनाने वाली कंपनी की ओर से भेजी जाएगी। निर्माण एजेंसी के एमडी मनुदेव का कहना है कि तकनीकी रूप से दक्ष टीम के सदस्य तेज गति से काम पूरा करेंगे। रेल मुख्यालय के अफसर भी मौके पर मौजूद रहेंगे।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

पुल 31 जनवरी तक चालू कर दिया जाएगा। स्टील गार्डर की करीब आधी खेप आ गई है। दो दिन में बाकी हिस्सा भी आ जाएगा। गार्डर लांचिंग के लिए ब्लाक की अड़चन की संभावना नहीं है। लोकल स्तर पर ब्लाक स्वीकृत हो जाएगा।

मान सिंह मीना, एडीआरएम

Posted By: Narendra Kumar

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