मुरादाबाद (प्रेमपाल सिंह)। मुरादाबाद ने एक बार फिर तहजीब के तराने पर अमन का फसाना लिखा है। जिगर के शहर ने यह जता व बता दिया है कि मुरादाबाद की रग रग में गंगा-जमुनी तहजीब बहती है। यहां रहने वालों के बीच प्रेम, सौहार्द व विश्वास इस कदर गहरा है कि धर्म व मजहब की दीवार उसे बांट नहीं सकती। मुरादाबाद की इस खूबसूरती को ही करीब से देखने व समझने का मौका शनिवार को हाथ लगा। 

शनिवार को ही अयोध्या प्रकरण पर   फैसले की घड़ी थी। साढ़े दस बजे फैसला आना था। सुबह से ही मुरादाबाद की हवाओं में प्रेम और भाईचारा घुला दिखा। गली, मुहल्ले और नुक्कड़ पर पूर्व की भांति ही लोग उमड़े मिले। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सभी का मानना था कि निर्णय सर्वमान्य होगा। कांठ रोड स्थित रामगंगा विहार तिराहे पर दाल की ढकेल पर खड़े आरपी सिंह लजीज स्वाद का लुत्फ उठा रहे थे। कुरेदने पर बराबर में खड़े कपूर साहब ने कहा कि सर्वमान्य फैसला ही इतिहास में दर्ज होगा। इस पर सभी में सहमति दिखी। नवीन नगर का जूस काउंटर भी गुलजार दिखा। वहां मिले लोग सुप्रीम फैसले व उसके बाद की स्थिति को लेकर आश्वास्त दिखे। 

महानगर की सड़कें सामन्य दिनों की अपेक्षा सूनी रहीं। बाजारों में भी लोगों की भीड़ अपेक्षाकृत कम थी। इसकी बड़ी वजह शनिवार की छुट्टी व  स्कूल, कालेज का बंद होना बताया गया। पीली कोठी पर बॉडी प्रोटेक्टर के साथ सुरक्षा कर्मी तैनात मिले। इससे राहगीरों का पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ रहा था। कपूर कंपनी तक पुलिस के पहरे में रहा। प्रस्तावित कार्यक्रम के बाद भी गांधी पार्क से कांग्रेसी नदारद रहे। स्कूटर पर दौड़ लगा रहे इकबाल रुके, बोले फैसला सभी के हित में है। राम मंदिर भी बनेगा और मस्जिद भी। पैदल चलते हुए इस्लाम ने कहा नेताओं की सोचो, उनका क्या होगा? उनकी दुकान लुट गई। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के इंतजामात थे। स्टेशन रोड से लेकर बुध बाजार तक दुकानें खुली मिलीं। दुकानदार व्यापार के साथ ही टीवी पर ही निगाह गड़ाए रहे। उनके कान हर खबर को गौर से सुन रहे थे। टाउनहॉल चौक पर पान की दुकान पर मिले सुरेश चंद्र ने कहा, अब तो फैसला हो गया।  बर्तन बाजार से लेकर मंडी चौक तक भीड़ कम रही। मुगलपुरा थाने में प्रशासनिक अमला मुस्तैद था। लालबाग के राम किशोर जौहरी ने बताया यहां दीपदान रोज होता है। आज भी होगा। गंगा आरती रोज होती है। चारों तरफ गंगा जमुनी तहजीब, शांति -सद्भावना व अमन-चैन ही अमन चैन दिखाई दिया। तहसील स्कूल, बरादरी में चहल पहल कम रही। 

गुरहट्टी, जैन मंदिर होते हुए अस्पताल पहुंचे तो वहां लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में सत्ता के दिग्गज थे, जनप्रतिनिधि थे। सभी ने फैसले के सम्मान की बात कही। दोपहर से शाम तक बाजार से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर कोई बदलाव नहीं दिखाई दिया। 

जिगर साहब का शेर शहर के अमन चैन तक सटीक बैठा। 

उनका जो फर्ज है वो अहल-ए-सियासत जानें 

मेरा पैगाम मुहब्बत है जहां तक पहुंचे। 

 

Posted By: Narendra Kumar

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