मुरादाबाद, जेएनएन। बरगद की पूजा का उल्लेख विधान स्कंद पुराण तथा भविष्येत्तर पुराण में भी है। निर्ययामृत ग्रंथ में भी वट सावित्री पर्व पर बरगद की पूजा का विधान दिया गया है। बरगद की उम्र करीब 500 वर्ष मानी जाती है। इससे महिलाएं इस बरगद जितनी उम्र स्वजनों को देने के लिए परिक्रमा करके इसकी पूजा करती आई हैं। 10 जून को वट सावित्री का पर्व है। इस पर्व पर सभी महिलाएं बरगद की पूजा नहीं करतीं। लेकिन, जो करती हैं, वह विधि विधान से पूजन करती हैं।

अबकी बार भी महिलाएं वट सावित्री पूजन करेंगी लेकिन, कई महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने अपने हाथ से रोपे बरगद के पौधे का पूजन करने का संकल्प लिया है। साथ ही पौधे की देखरेख भी करेंगी। तीन स्थानों पर महिलाओं ने बरगद के पौधे रोपे। महिलाओं का कहना कि कोरोना काल में आक्सीजन के लिए मारामारी मची रही। लेकिन, नेचुरल आक्सीजन 24 घंटे देने वाले बरगद के पेड़ को हम भूल बैठे हैं। घर के गार्डन व गमले में बरगद का पौधा लगाकर अपने आसपास भरपूर आक्सीजन मिलेगी। आजाद नगर ब्रजधाम वेलफेयर डवलपमेंट ट्रस्ट की ओर से अवधेश शर्मा, लता शर्मा व सुशीला शर्मा ने बरगद का पौधा रोपकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया। अध्यक्ष ऋषिदेव शर्मा व सचिव ब्रजेंद्र कुमार शर्मा ने भी पौधरोपण में सहयोग किया। खुशहालपुर की बैंक कालोनी में भी वार्ड तीन की पार्षद द्रोपादेवी ने महिलाओं के साथ बरगद का पौधा रोपा। इधर, आशियाना स्थित टंकी वाला पार्क में भी महिलाओं ने बरगद का पौधा रोपा।

वट सावित्री का पर्व एक वैवाहिक महिला के लिए बहुत मायने रखता है। बरगद की पूजा करके उसकी उम्र की तरह पति की आयु की कामना की जाती है। हम भी अपने द्वारा रोपे पौधे की पूजा के साथ ही इसका संरक्षण करेंगी।ज्योति एवं मनीषा गर्ग,

बरगद के पेड़ की अहमियत कोरोना काल में पता चली। सबसे ज्यादा आक्सीजन देने वाला पौधा बरगद बताया जा रहा है। हम अपने द्वारा रोपे पौधे की देखभाल करेंगी।

अवधेश शर्मा एवं मंजू लता शर्मा

Edited By: Narendra Kumar