मुरादाबाद (श्रीशचंद्र मिश्र) : बात तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी है। जिस शहर के बाजार में झुमका गिरा था, उसी बरेली की एक होनहार बेटी अंतरराष्ट्रीय फलक पर छाने को बेताब थी। बैडमिंटन की दुनिया में देश का नाम रोशन करना उसका सपना था। इटली से आमंत्रण भी मिला। संसाधन व सरकारी प्रोत्साहन का अभाव राह में रोड़ा बना और पाव पीछे खींचने पड़े। दिल पर पहाड़ बनकर टूटी इस घटना ने उन्हें झकझोर तो दिया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उच्च शिक्षा प्राप्त करके खेल प्रशिक्षक बनीं और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज शिखा ढल सरीखी महिला खिलाड़ियों के उद्भव और उत्थान का कारण बनीं। प्रतिभाओं को तराशने में जुटी हैं

हम बात कर रहे हैं देश की उस दूसरी महिला स्पो‌र्ट्स टीचर की, जो इस वक्त पीतल नगरी मुरादाबाद के पीलीकोठी चौराहा स्थित मैथोडिस्ट ग‌र्ल्स इंटर कालेज में खेल प्रतिभाओं को तराशने में जुटी हैं। खेल की हर विधा पर बराबर की पकड़ रखने वाली एन पूर्णिमा रिचर्डस उर्फ पूनम रिचर्डस के खून में स्पो‌र्ट्स है। मा प्रतिभा रिचर्डस हाकी खिलाड़ी रही हैं। जबकि पिता सीटी रिचर्डस फुटबाल व बैडमिंटन के क्षेत्र में नाम रोशन करने की तमन्ना लेकर

खेल मैदान में उतरा करते थे। महज तीन साल की उम्र में ही पूनम ने मा-बाप को अपना प्रेरणास्त्रोत बना लिया। खेल मैदान में उनके साथ जाने लगीं। स्कूली शिक्षा के दौरान बैडमिंटन व वॉलीबाल में पूनम की प्रतिभा सराही गई। जनपद, मंडल, प्रदेश और फिर देश में अपना नाम रोशन करने वाली पूनम रिचर्डस महज 15 साल की आयु में तब उछल पड़ीं, जब उन्हें इटली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्कूल गेम्स में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का प्रस्ताव मिला। किशोर मन सपने बुनने लगा, लेकिन कुछ ही दिन में उम्मीदों पर वज्रपात हुआ। बताया गया कि पर्याप्त फंड की अनुपलब्धता के कारण पूनम इटली नहीं जा पाएंगी। इस एक

वाकये ने पूनम के जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। पूनम कहती हैं कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी को उसकी मंजिल न मिलने का मलाल क्या होता है, यह मुझसे बेहतर भला कौन समझ सकता है। मन के मलाल ने जीवन को इस कदर प्रभावित किया कि वह महिला खेल प्रशिक्षक बन गईं। मेजर की उपाधि की है हासिल

एनसीसी में मेजर की उपाधि हासिल करने वाली पूनम ने अपना ध्यान पढ़ाई पूरी

करने पर लगाया। खेल प्रशिक्षक के रूप में बेंगलौर (बेंगलुरु) से आमंत्रण

मिला। इसे खारिज कर वह उत्तर प्रदेश की प्रतिभाओं को तराशने व निखारने में जुट गईं। 1993 में वह मैथोडिस्ट इंटर कालेज, मुरादाबाद में बतौर खेल टीचर नियुक्त हुईं। दूसरे खिलाडिय़ों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना व इससे मिली

मुस्कान में अपनी खुशी तलाश करना, पूनम के जीवन का हिस्सा बन गया। पूनम रिचर्डस की उपलब्धिया

अंतरराष्ट्रीय महिला निशानेबाज शिखा ढल को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया। करीब दो सौ छात्र-छात्राएं बने खेल प्रशिक्षक। 50 से अधिक खिलाड़ियों ने पाई रेलवे में नौकरी। एनसीसी की कुशल ट्रेनिंग देकर छात्रों को सेना व शिक्षा के क्षेत्र में भेजा। ये है आखिरी तमन्ना

सेवानिवृत्ति के बाद पूनम की तमन्ना है कि वह उन लोगों के लिए अपने जीवन का उत्तरार्ध समर्पित करें, जो बुढ़ापे में अनाथ हैं। उन युवतियों व महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनें, जो दुष्कर्म व दरिंदगी की शिकार हैं। अपने जीवन की कमाई वृद्धा आश्रम व दुष्कर्म पीड़ितों की मदद में खर्च करना चाहती हैं।

Posted By: Jagran