श्रीशचंद्र मिश्र, राजन ’, मुरादाबाद : पीतल नगरी को उत्तराखंड से जोड़ने वाला जर्जर ढेला पुल सियासत की अनदेखी का गवाह है। 65 वर्ष पहले बने इस पुल पर किसी भी नेता या दल ने ध्यान नहीं दिया। भारी भरकम वाहन ही नहीं बल्कि लोनिवि की ढेरों उम्मीदों को भी ढो रहा है। बावजूद इसके पुल का कायाकल्प अब तक नहीं हुआ। यही वजह है कि यह सकरा पुल अब जानलेवा हो गया है। बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी जर्जर पुल की भेंट चढ़ रहे हैं। हादसों में लगातार वृद्धि और चौबीस घंटे जाम से जूझना ही ढेला पुल की नियति बन गई है।

पीतलनगरी को उत्तराखंड से जोड़ता है यह पुल 

मुरादाबाद-काशीपुर मार्ग पर ढेला नदी पर 65 वर्ष पहले बना पुल उत्तराखंड का प्रवेशद्वार कहा जाता है। यही वजह है कि मुख्य मार्ग पर वाहनों का भारी दबाव रहता है। अब गौर करें पुल की लंबाई और चौड़ाई पर। लगभग 80 मीटर लंबे पुल की चौड़ाई सिर्फ 13 फीट है। पूरा पुल दो खंभे पर टिका है। पुल के दोनों तरफ बनी रेलिंग टूट कर नदी में लटक रही है। पुल पर दर्जनों गड्ढे हैं। पुल पार करने में वाहन चालकों के माथे पर पसीने छूटते हैं। अनहोनी की आशंका वाहन चालकों के सिर चढ़कर बोलती है। भारी वाहनों के चढ़ते ही पुल कांपने लगता है।

ढेला नदी पर बना यह पुल पीतलनगरी को उत्तराखंड से जोड़ता है। 65 वर्ष पहले बने इस जजर्र सिंगल लाइन पुल की कोई सुध नहीं ले रहा।

व्यवस्था जस की तस

ढेला पुल का निर्माण 65 वर्ष पहले हुआ। तब से लेकर आज करोड़ों क्यूसेक पानी ढेला में बह चुका है। लेकिन व्यवस्था बदलने का नाम नहीं ले रही। खामियाजा यात्री भुगत रहे हैं। ढेला पुल के दोनों तरफ चौबीस घंटे वाहन खड़े मिलेंगे।

होमगार्ड जवान कराते हैं नैया पार

ढेला पुल के दोनों तरफ पूरे दिन होमगार्ड जवान तैनात रहते हैं। इनकी ही अवागमन सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी है। होमगार्ड संजय बताते हैं कि दो बड़े वाहन विपरीत दिशा से पुल पार नहीं हो सकते। आवागमन बहाल रखने के लिए इंतजार ही एक मात्र उपाय है।

देखती रह गई मां और हो गई बच्चे की मौत

ढेला पुल के जीर्णोद्धार को लेकर रहनुमा भले ही लापरवाह हों, लेकिन खामियाजा आम लोग उठा रहे हैं। बताया जाता है कि वर्ष 2018 में बाइक सवार एक महिला ठाकुरद्वारा की ओर से आई। उसकी गोद में एक छोटा बच्चा था। ढेला पुल पार कर रही मां के होश अचानक उड़ गए। गोद में मौजूद उसका मासूम बेटा छिटक कर पुल पर गिर पड़ा। पीछे से आ रहे वाहन ने बच्चे को रौंद दिया। घटना ने महिला और राहगीरों को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद ढेला पुल घंटों जाम से जूझता रहा।

क्या कहते हैं ग्रामीण 

मुन्नू सिंह बताते हैं कि मेरा गांव आदमपुर पुल के ठीक पास है। हर रोज पुल पर जाम लगता है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब छोटी बड़ी दुर्घटनाएं यहां न हों। इससे स्थिति और विकट हो जाती है। युनूस का कहना है कि पुल सकरा होने के कारण दोनों तरफ हर वक्त दर्जनों वाहन खड़े रहते हैं। इससे जाम की स्थिति बन जाती है। जाम से निपटने में मशक्कत करनी पड़ती है। महिपाल कहते हैं कि सकरा व जर्जर होने के कारण ढेला पुल खतरनाक हो चुका है। पुल पार करने की मजबूरी वाहन चालक व यात्रियों पर भारी पड़ रही है। आए दिन हादसे हो रहे हैं।

Posted By: Narendra Kumar

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