मुरादाबाद (प्रदीप चौरसिया): ट्रेन कहा चल रही है और कहा फंस सकती है? इसकी जानकारी अब रेलवे अधिकारियों को घर या ऑफिस में बैठे-बैठे मिल जाएगी। यह होगा स्फूर्ति एप से, जो सेटेलाइट और मोबाइल नेटवर्क के जरिए ट्रेनों की लोकेशन देता रहेगा। इसके जरिए फंसने वाली ट्रेनों को आगे निकालने के संबंध में कर्मियों को अधिकारी दिशा-निर्देश भी दे सकेंगे। इससे ट्रेनों के संचालन को गति मिलेगी। अभी यह सुविधा फिलहाल आम यात्रियों के लिए उपलब्ध नहीं होगी। नेटवर्क के जरिए होगी निगरानी रेलवे ने सेटेलाइट और मोबाइल नेटवर्क के जरिये ट्रेनों और मालगाड़ियों पर निगरानी रखने के लिए एक सिस्टम तैयार किया है। सभी अधिकारी व ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मियों को ऑनलाइन ट्रेनों की स्थिति की जानकारी देने के लिए स्फूर्ति नाम का एप तैयार किया है। इसके लिए अधिकारियों को टैब भी उपलब्ध कराए गए हैं। अभी तक ट्रेन या मालगाड़ी किस स्टेशन से कब चली है और किस स्टेशन पर पहुंचेगी, इसकी जानकारी ट्रेन संचालन करने वाले कर्मियों के पास होती है। बीच रास्ते में ट्रेन कैसे चल रही है, चेन पुलिंग व अन्य कारणों से ट्रेन खड़े होने पर जानकारी नहीं मिलती है। इसकी जानकारी करने के लिए चालक या गार्ड के मोबाइल या वाकीटाकी पर संपर्क करना पड़ता है। मालगाड़ी के पीछे कितनी ट्रेनें है? इसकी जानकारी के लिए अधिकारियों को कंट्रोल रूम पर निर्भर रहना पड़ता है। रेलवे ने इस समस्या के समाधान के लिए स्फूर्ति एप वाला टैब ट्रेन संचालन से जुड़े अधिकारियों को उपलब्ध कराया है। अधिकारी एप पर स्टेशन या रेल मार्ग का नाम डालेगा, उस मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों व मालगाड़ी की विस्तृत जानकारी टैब में उपलब्ध हो जाएगी। ट्रेन कहा चल रही है? इसकी सही जानकारी मिल पाएगी। साथ ही घर पर बैठे अधिकारी ट्रेनों के संचालन की रूपरेखा बना सकते हैं और ट्रेनों व मालगाड़ी को गतंव्य तक पहुंचाने की योजना बना सकते हैं। इस व्यवस्था से मालगाड़ी के कारण लेट होने वाली ट्रेनों को निर्धारित समय पर चलाया जा सकता है। इससे ट्रेनों के संचालन में आने वाली बाधा खत्म हो जाएगी और लेट चलने वाली ट्रेनों के समय में सुधार किया जा सकता है। आम यात्रियों को नहीं मिलेगी सुविधा

मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि स्फूर्ति एप से मालगाड़ी व ट्रेन संचालन की जानकारी मिलना शुरू हो गई है। इससे कोहरे में ट्रेन संचालन में काफी मदद मिलेगी और ट्रेनों के समय में सुधार किया जा सकता है।

Posted By: Jagran