Lok Sabha By-Elections Result 2022: रामपुर [मुस्लेमीन]। मुस्लिमों का राजनीतिक सोच बदल रहा है तो, समाज में जाति की दरारें भी चौड़ी हो रही हैं। लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी के हाथों मोहम्मद आजम खां के नजदीकी आसिम राजा की हार में मुस्लिमों का बड़ी संख्या में भाजपा की ओर मुड़ना है। यही नहीं चुनाव में जाति का मुद्दा भी रंग ले गया। शम्सी प्रत्याशी आसिम राजा से पठान और आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमान कटे-कटे रहे। पठानों के गढ़ में एक बार विभाजन की ऐसी शुरुआत होने पर आगामी चुनावों में यह और बढ़ भी सकती है।

मुस्लिमों के लिए चुनावों में अब तक भाजपा हराओ का सोच प्रमुख रूप से काम करता रहा है। तीन माह पहले विधानसभा चुनाव में भी मुसलमान भाजपा के खिलाफ थे। लोकसभा उपचुनाव में स्थिति बदल गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम समाज में सोच बन रहा है कि वह पिछले दो चुनावों से केंद्र और प्रदेश की सत्ता से दूर हैं। ऐसे में उनकी बात सत्ता तक ठीक से नहीं पहुंच पाती।

ऐसे में भाजपा से दूरी बनाए रखने पर क्यों जोर दिया जाए। यही नहीं चुनाव में प्रारंभ से ही शम्सी और गैर शम्सी का मुद्दा अंदर ही अंदर जोर पकड़ गया। यह सपा नेता आजम खां को परेशान करता रहा। उन्होंने चुनावी भाषण में आसिम के शम्सी होने पर स्थिति स्पष्ट की तो, चुनाव के दिन उन्हें गैर शम्सी मुस्लिमों के वोट के लिए कम निकलने पर मतदान के लिए वीडियो भी जारी करना पड़ा।

इसके बावजूद मुस्लिमों ने सपा के पक्ष में एकजुटता नहीं दिखाई। यही वजह रही कि परिणाम आने पर राजनीतिक तस्वीर बदल गई। यदि मतों के आंकड़ों पर जाएं तो विधानसभा चुनाव में सपा को लगभग 5.50 लाख वोट मिले थे और भाजपा को चार लाख। लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी आसिम राजा को 3.25 लाख वोट ही मिल सके, जबकि भाजपा के घनश्याम सिंह को 3.67 लाख वोट मिले हैं।

लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात समझाने में भी सफलता मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत दर्जनभर मंत्री यहां पहुंचे। मुसलमानों को बार-बार बताया कि भाजपा ने किसी योजना में कहीं भेदभाव नहीं किया। वह मुस्लिमों का भी विकास करना चाहती है। भाजपा का सांसद बनेगा तो रामपुर के साथ ही उनका भी विकास होगा। यह बात मुसलमानों की सोच में बदलाव के लिए प्रेरक रही।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के स्थानीय संबंधों के चलते कई प्रभावी मुसलमान खुलकर भाजपा के साथ आ गए। कुछ नेता ऐसे भी हैं, जिन्होंने सपा नेता आजम खां से नाराजगी के चलते भाजपा का साथ दिया। पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां इनमें सबसे आगे थे। सपा नेता आजम उन पर सीधे प्रहार कर रहे थे, इसलिए नवेद मियां के लिए उनकी हार महत्वपूर्ण थी।

एमएलसी चुनाव से ही लिखी जाने लगी थी पटकथा : ढाई माह पहले विधान परिषद की बरेली-रामपुर सीट पर चुनाव हुआ था। तब भी मुसलमानों ने भाजपा का साथ दिया था। इस सीट पर 1796 मुस्लिम मतदाता हैं, लेकिन सपा प्रत्याशी मशकूर अहमद मुन्ना को मात्र 401 वोट ही मिल सके थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी कुंवर महाराज सिंह को 4227 वोट मिले थे। लेकिन, इस चुनाव में ग्राम प्रधान और बीडीसी सदस्य ही वोटर थे।

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Edited By: Umesh Tiwari