मुरादाबाद। जनपद में मतदान कराकर वापस लौटे कर्मचारियों को मंडी समिति में मुसीबत का सामना करना पड़ा। देर रात ईवीएम जमा करने के लिए कर्मचारियों को घंटों इंतजार करने के साथ ही अव्यवस्थाओं का सामना पड़ा। जिसमें महिलाओं को काफी परेशानी हुई। चुनाव को संपन्न कराने के लिए 10,552 कर्मचारियों को लगाया गया था। जब इतनी बड़ी तादात में कर्मचारी वापस लौटे तो मंडी समिति में खड़े होने के लिए भी जगह नहीं बची। ऐसे में स्ट्रांग रूम में ईवीएम जमा करने को लेकर लाइन में जमकर धक्का-मुक्की हुई। जिस भी कर्मचारी को जहां से जगह मिली, वह कतार में सबसे पहले खड़े होने की कोशिश करता रहा। अव्यवस्थाओं के चलते दिनभर मतदान संपन्न कराकर लौटे कर्मचारियों को दोगुना परेशानी हुई। मंडी में समिति में एक स्टाल में विधानसभावार बीस ईवीएम जमा करने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कम जगह के चलते कर्मचारी कतार में भी खड़े नहीं हो पा रहे थे। महिला कर्मचारी अपने बच्चों के साथ घंटों कतार में खड़ी रही। कर्मचारियों के अंदर प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर काफी असंतोष दिखा। रात 12 बजे तक सैकड़ों कर्मचारियों की ईवीएम जमा नहीं हो पाई थीं। वहीं, जिनकी ईवीएम जमा हो गई उनको घर जाने के लिए वाहन भी नहीं मिले।

मूंढापांडे के गांवों में कई घंटे रहा चुनाव बहिष्कार

मूंढापांडे के ढाई किलोमीटर के फासले पर हसनगंज गांव का विकास नहीं होने पर लोगों ने मतदान करने से इन्कार कर दिया। लोग मतदान केंद्र से अलग खड़े रहे। गांव के लोगों का कहना था कि प्रधान योगेश कुमार ने विकास के नाम पर ठेंगा दिखाया है। सड़क और शौचालय नहीं बनवाए हैं। पिंटू, विजय कुमार, जितेंद्र कुमार, धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हम लोग किस तरह वोट करें। पांच घंटे तक मतदान केंद्र में सन्नाटा पसरा रहा। वहीं बिकनपुर का मझरा लोधीपुरा में पुल निर्माण नहीं होने पर ग्रामीणों ने पांच घंटे बाद मतदान किया। मूंढापांडे के बूथ संख्या 183 में ईवीएम सुबह नौ बजे खराब हो गई। दोपहर 12 बजे मतदाताओं के हंगामा काटने पर सेक्टर मजिस्ट्रेट ने ईवीएम बदलवाई।

मृतक बने मतदाता, जिंदा सूची से गायब

मतदाता पुनरीक्षण अभियान और बीएलओ कितने मुस्तैद हैं। इसका मजमून चुनाव के दिन दिखाई दिया। महीनों तक चले इस अभियान के बावजूद मतदान वाले दिन मतदाता सूची में विसंगतियां सामने आयीं। कई लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब मिले तो कई सूचियों में मृत लोगों को भी मतदाता बना दिया गया। जिस कारण सैंकड़ों लोगों को मत के अधिकार से वंचित रहना पड़ा।

मतदाता सूची में नाम जोडऩे के लिए प्रशासन की ओर से मतदाता पुनरीक्षण अभियान चलाया गया था। वहीं बीएलओ को भी जिम्मेदारी दी गई थी कि वे घर- घर जाकर लोगों को मतदाता सूची से जोड़ें। इसके बावजूद मतदान करने पहुंचे लोगों को बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। दरअसल, कई लोगों के पास पर्ची और वोटर आइडी कार्ड होने के बावजूद मतदाता सूची में उनका नाम नहीं मिला, जिसके बाद उन्हें मतदान करने से मना कर दिया गया। वहीं कई बूथों पर ऐसे लोगों के नाम भी सूची में जुड़े मिले जिनकी मृत्यु दो से तीन साल पहले हो चुकी थी। लोगों के बताने पर उनके नाम मतदाता सूची से काटे गए।

पर्ची बदलने के कारण भी नहीं डाल पाए वोट

इसके अलावा कई लोग पर्ची होने के बावजूद भी वोट के अधिकार से वंचित रह गए। दरअसल, कई मतदाता ऐसे थे जिनके पास दूसरे किस्म की पर्ची पहुंची थी। वहीं मतदान फोटो लगी पर्ची दिखाने पर ही हो रहा था। जिस कारण मतदताओं को वापस कर दिया गया। इसको लेकर मतदाताओं ने नाराजगी भी दर्ज कराई। किसी का कहीं बूथ हो गया और किसी का वोट नहीं मिला। इससे परेशानी झेलनी पड़ी।  

Posted By: Narendra Kumar

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