विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आरटीई घोटाला: सिर्फ दाखिले के ₹1 लाख नहीं, गरीब बच्चों के ₹5000 वजीफे में भी मांगी रिश्वत

Published: Sun, 14 Jun 2026 06:15 AM (IST)

मुरादाबाद में आरटीई दाखिला घोटाले में तत्कालीन डीसी अमित कुमार सिंह ने सिर्फ प्रवेश के लिए ही नहीं, बल्कि गरीब ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

HighLights

  1. मानक से अधिक नाम मिलने के बाद स्कूल संचालकों ने की थी शिकायत, फिर हुई कार्रवाई

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। शहर के नामी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के माध्यम से गरीब बच्चों का निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये लेने वाले तत्कालीन डीसी अमित कुमार सिंह ने फीस प्रतिपूर्ति अनुदान राशि के तहत मिलने वाले रुपये में से भी रिश्वत मांगी थी। अब तक की पुलिस जांच में यह बात सामने आई है।

अभि‍भावकों तक पहुंची पुल‍िस

पुलिस उन गरीब बच्चों के अभिभावकों तक भी पहुंच गई है जिनके दाखिले कराने के नाम पर डीसी ने एक-एक लाख रुपये लिए थे। अब डीसी विभागीय जांच के साथ पुलिस की कार्रवाई में फंसते हुए नजर आ रहे हैं। 15 मई को आरटीई के अंतर्गत निजी स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों की जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी।

मानक व‍िरुद्ध आवंट‍ित की अध‍िक सीटें

इसमें पीएमएस स्कूल, रानी प्रीतम स्कूल, एसएस चिल्ड्रन अकादमी, केसीएम स्कूल, सेंट मीरा एकेडमी, टाइनी टाट्स कालेज, आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल, गांधी नगर पब्लिक स्कूल, सीएल गुप्ता स्कूल के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने शिकायत की थी कि स्कूलों में सीटों की मैपिंग यू-डायस पर पर छात्र संख्या के अनुसार 25 प्रतिशत सीट आवंटित न करते हुए मानक के विरुद्ध अधिक सीटें आवंटित कर दी गईं।

लड़क‍ियों के स्‍कूल में लड़कों का आवंटन

इसके अलावा बालिका विद्यालयों में बालकों की सीट का आवंटन कर दिया गया। कई प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने शिकायत की थी कि तत्कालीन जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता अमित कुमार सिंह ने रिश्वत लेकर अच्छे विद्यालय में मैपिंग में सीट सत्यापित करके सीट आवंटित कर दी गई।

डीएम ने दि‍ए प्राथम‍िकी के आदेश

यह शिकायत मिलने से पहले अमित कुमार सिंह को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज सिंह ने निलंबित कर दिया था। लेकिन, जब वर्तमान जिलाधिकारी डाॅ. राजेंद्र पैंसिया को इस बड़े मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए। इसके बाद मूंढापांडे थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी लिखी।

तत्‍कालीन डीसी ने मांगी र‍िश्‍वत

पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया कि जिन बच्चों का आरटीई के तहत दाखिला हुआ है उन्हें सरकार की तरफ से फीस प्रतिपूर्ति अनुदान राशि के तहत पांच-पांच हजार रुपये मिलते हैं। यह रुपये सीधे अभिभावकों के खाते में जाते हैं। तत्कालीन डीसी ने गरीब बच्चों को अनुदान राशि देने के नाम पर भी रिश्वत मांगी थी।

र‍िश्‍वत न म‍िलने पर वापस क‍िए चार करोड़ रुपये

जब रिश्वत नहीं मिली तो मुरादाबाद जिले के करीब चार करोड़ रुपये वापस करा दिए थे। अब उन रुपये को दोबारा मंगाने के लिए शासन को पत्र लिखा है। सीओ वरुण कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

आरटीई के लिए प्रवेश प्रक्रिया

आरटीई के तहत प्रक्रिया में पोर्टल पर अभिभावकों को अपने वार्ड के विद्यालय में प्रवेश के आवेदन करना होता है। आवेदन करने के दौरान ही अपने आय, निवास, जन्मतिथि और बैंक खाते से जुडे दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। जिनका सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारी के लागिन पर होता है।

दूसरा सत्यापन बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर होता है। आवेदन सत्यापित होने पर जिला प्रशासन की मौजूदगी में लाटरी निकाली जाती है जो कि पूरी तरह कम्प्यूटराइज होती है। मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता है।

इस दौरान अभ्यर्थी की ओर से भरे गए स्कूल के विकल्पों में से सीट की उपलब्धता के आधार स्कूल आवंटित होता है। इसके लिए आवेदन शुरू होने से पहले ही मैपिंग होती है जो कि जिला स्तरीय अधिकारियों की ओर से होती है। इस बार मैपिंग खंड शिक्षा अधिकारी स्तर से हुई थी।

यह भी पढ़ें- 'जाओ डीएम से ही काम करा लेना...' सचिव की ये अकड़ पड़ी भारी, मुरादाबाद में जिलाधिकारी ने तुरंत थमाया सस्पेंशन लेटर