मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। Rampur Nawab Family : रामपुर नवाब खानदान की संपत्ति में राज्य सरकार भी पक्षकार बनना चाहती है। इसके लिए जिला शासकीय अधिवक्ता ने मंगलवार को अदालत में बहस की। कहा कि इस संपत्ति में सीलिंग की जमीन भी शामिल है, जिसपर राज्य सरकार का अधिकार है। इसलिए राज्य सरकार को भी पक्षकार बनाया जाए।

रामपुर में नवाब खानदान की 2600 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, जिसके बंटवारे की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। 31 जुलाई 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने शरीयत के हिसाब से बंटवारा करने के आदेश दिए थे। बंटवारे की जिम्मेदारी जिला जज को सौंपी गई। जिला जज ने संपत्ति का सर्वे और मूल्‍यांकन कराने के बाद जुलाई में विभाजन योजना पेश की, जिसपर पक्षकारों से आपत्ति दाखिल कीं। इनकी आपत्तियों पर भी बहस हो चुकी है। इस बीच राज्य सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता भी प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। इसपर मंगलवार को उन्होंने बहस की। उन्होंने तर्क दिया कि नवाब खानदान की संपत्ति में सीलिंग की जमीन भी शामिल है और सीलिंग की जमीन पर राज्य सरकार का अधिकार होता है। इस संबंध में आदेश भी जारी हो चुका है, इसके विरोध में नवाब खानदान के लोग हाईकोर्ट भी गए, लेकिन कोई राहत नहीं मिल सकी। बाद में सुप्रीम कोर्ट भी गए, वहां से फिर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। उन्होंने कहा कि नियमानुसार सीलिंग की जमीन निकल रही है, इसलिए राज्य सरकार को भी इस मुकदमे में पक्षकार बनाया जाए। डीजीसी ने बताया कि उन्होंने बहस की है। अब इसपर दूसरे पक्ष की बात सुनी जाएगी। इस मामले में आज भी अदालत सुनवाई करेगी। संपत्ति बंटवारे के मामले में भारत सरकार की ओर से भी अदालत में प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। जिसमें कहा कि पाकिस्तान के पूर्व एयर चीफ मार्शल अब्दुल रहीम खान की पत्नी मेहरुन्निशा बेगम के हिस्से में आ रही जायदाद शत्रु संपत्ति है, इसलिए उसे भारत सरकार को दिया जाए। मेहरुन्निशा बेगम रामपुर रियासत के आखिरी नवाब रजा अली खां की बेटी हैं।

Edited By: Narendra Kumar