मुरादाबाद, जेएनएन। कागजों में 160 बीघे की झील, लेकिन मौके पर सिर्फ सूखा मैदान ही नजर आएगा। जगह-जगह गड्ढों में भरा हुआ पानी दिखाई देगा। कभी प्रवासी पक्षियों की चह-चहाहट और कमल के फूल के लिए मशहूर मौढ़ातैया झील बदहाली स्थिति में है। अब झील को पुनर्जीवित करने के लिए पहल हुई है। मनरेगा के तहत 12.50 लाख खर्च कर प्रथम चरण में चारों तरफ वॉकिंग ट्रैक बनाने के साथ ही पौधारोपण  कराया जाएगा। इसके बाद पर्यटन विभाग द्वारा जिला निधि से झील का जीर्णोद्धार कराने की तैयारी है।

एसडीएम ने कराई पैमाइश

एसडीएम कांठ प्रेरणा सिंह ने खंड विकास अधिकारी, लेखपाल और ग्रामीणों की मौजूदगी में झील के चारों तरफ बनने वाले वाकिंग ट्रैक की पैमाइश कराई। इस पर निगरानी के लिए ड्रोन से तस्वीर ली जाएगी। दिल्ली तक होती थी सप्लाई -मौढ़ातैया झील में वॉकिंग ट्रैक बनाने के लिए मनरेगा के तहत 200 मजदूरों को लगाया जाएगा। इसमें प्रवासी मजदूर भी शामिल होंगे, जिनका क्वारंटाइन समय पूरा हो गया है। झील की मेढ़बंदी कर सरकारी ट्यूबवेल से झील को भरा जाएगा। ग्रामीण बताते हैं कि पांच साल पहले तक इसकी नीलामी होती थी। झील से मछलियों और कमल के फूल की सप्लाई दिल्ली तक होती थी। नीलामी बंद होने के बाद झील बदहाल हो गई। अप्रवासी पक्षियों की आवाज ठंड शुरू होते ही सुनाई देती, लेकिन अब तो इसका 75 फीसद से अधिक हिस्सा हमेशा सूखा रहता है।

प्रोजेक्ट बनाया गया 

कांठ की एसडीएम प्रेरणा सिंह ने बताया कि पैमाइश हुई है, शुक्रवार से वॉकिंग ट्रैक बनाने का काम शुरू होगा। इसके बाद झील का जीर्णोद्धार भी होगा, ताकि इसमें प्रवासी पक्षियों की चह-चहाहट के साथ ही दोबारा कमल खिलें। पर्यटन विभाग द्वारा भी प्रोजेक्ट बनाया गया है। जरूरत पड़ी तो झील के लिए अलग से बजट का प्रावधान कराया जाएगा, ताकि झील पुनर्जीवित हो सके। अभी शुरुआती दौर में इस पैसे से काम शुरू कराया जा रहा है। बचे कार्य के लिए और पैसा दिया जाएगा।

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