मुरादाबाद (जेएनएन)। पीतलनगरी मुरादाबाद में माचिस की डिब्बी से गायब 19 तीलियां बेहद चर्चा का विषय बनी है। इन दिनों सोशल मीडिया में बिजली विभाग के कार्यालय से 19 तीलियों की माचिस गायब होना बवाल ए जान बन गया है। इससे विभाग तप रहा है। देश भर में विभाग की बदनामी होने के बाद अब यह पता किया जा रहा है कि आखिर पत्र किसने लिखा था।

दरअसल हुआ ऐसा कि एई मीटर सुशील कुमार ने अपने कार्यालय से 19 तीली समेत माचिस वापस करने के लिए कार्यालय सहायक को पत्र लिखा, जिसकी प्रतिलिपि अधीक्षण अभियंता को थी। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ट्विटर पर पहुंचते ही बिजली विभाग की बदनामी होने लगी। बहस छिड़ गई है। बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। इस मामले पर अब विभागीय इंजीनियर चुप हो गए और शिकायती पत्र को गलत करार दिया। अब इसको शरारती तत्व के सुशील कुमार के नाम से पत्र लिखने की बात कही जा रही है।

माचिस प्रकरण

इंजीनियर सुशील कुमार ने कार्यालय सहायक मोहित के नाम पत्र लिखा, जिसमें जिक्र था कि तीन जनवरी को रात 8:30 बजे एक माचिस में 19 तीली थीं, जो दफ्तर में मच्छर भगाने के लिए क्वाइल जलाने के लिए रखी थी। खेद का विषय है कि एक फरवरी तक माचिस वापस नहीं की गई। इससे रात में बिजली गुल होने पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पत्र मिलने के तीन दिन के अंदर माचिस वापस करना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

...तो खाली बैठे हैं बिजली अधिकारी-कर्मचारी

बिजली विभाग के एई मीटर द्वारा लिखे शिकायती पत्र में शब्द संख्या 203 है। सोशल मीडिया में इसका जिक्र है कि पत्र को लिखने में तकरीबन 30 से 35 मिनट का समय लगा होगा। इस हिसाब से एई मीटर कई उपभोक्ताओं के मीटर की फाइल का निस्तारण कर सकते थे। इससे स्पष्ट है कि अधिकारियों के पास कितना समय खाली रहता है।

एई मीटर का पत्र हैरानी वाला

मुख्य अभियंता ईश्वर पाल सिंह ने कहा कि एई मीटर के इस तरह के पत्र को लेकर हैरानगी है। सोशल मीडिया पर पत्र वायरल हो रहा है। अधीक्षण अभियंता से रिपोर्ट मांगी गई है।

कम्प्यूटर ऑपरेटर को भाषा समझाने को लिखवाया था पत्र

दरअसल यह पूरा वाकया बिजली गुल होने की वजह से हुआ था। कार्यालय में तैनात रहे एई मीटर सुशील कुमार अब यह कह रहे हैं कि कार्यालय में एक कम्प्यूटर ऑपरेटर को प्रशिक्षण देते समय पत्र की यह भाषा हो गई थी। कार्यालय में लाइट जाने के बाद जब मोमबत्ती जलाने के लिए माचिस खोजने लगे, तभी दिमाग में यह विचार आ गया। इसी विचार को आधार बनाते हुए प्रशासनिक अफसरों को पत्र लिखने की भाषा का प्रयोग किया गया था। ऐसा कोई शिकायत पत्र नहीं भेजा गया। कम्प्यूटर के पास रखे इस पत्र का फोटो खींचकर वायरल कर दिया गया है।

डीजीपी कार्यालय से मिला कार्रवाई का आश्वासन

जब यह पत्र सोशल मीडिया के माध्यम से डीजीपी कार्यालय तक पहुंचा। उनके पीआरओ राहुल श्रीवास्तव ने ट्वीट कर कार्रवाई का भरोसा जताया। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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