सचिन चौधरी, मुरादाबाद। Peepal Tree News :  प्रकृति से खिलवाड़ हमारे जीवन के लिए घातक होता है यह बात अब तक हर कोई कहता था, लेकिन इसके बाद भी लोग प्रकृति से खिलवाड़ करते चले आ रहे थे, लेकिन अब आपदा आई तो लोगों को पुरानी प्रकृति की याद तो आई ही साथ ही जरूरत भी पड़ने लगी। इस समय कोरोना के चलते लोगों का आक्सीजन लेवल कम हो जा रहा है। तमाम ऐसे लोग है जिन्हें कोरोना नहीं है, लेकिन इसके बाद भी आक्सीजन लेवल कम हो रहा है।

ऐसे में वह अब पीपल के पेड़ का सहारा ले रहे हैं, लेकिन प्रकृति से खिलवाड़ का ही नतीजा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी पीपल के पेड़ों को तलाशना पड़ रहा है। जहां पर पीपल का पेड़ हैं वहां पर लोग दोपहर का समय बिता रहे हैं। जिससे पीपल के पेड़ से निकलने वाली आक्सीजन को लोग ग्रहण कर सके।

हाईटेक जमाने में लोगों को पेड़ों की छाया की बिल्कुल ही जरूरत खत्म होने लगी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेड़ों की छाया का इस्तेमाल कम ही लोग कर रहे हैं, लेकिन जैसे ही कोरोना का संकट गहराया तो लोगों को प्रकृति याद आने लगी। कुछ वर्ष पहले तक ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरों में भी पीपल के पेड़ों को आसानी से देखा जा सकता था, लेकिन अब अचानक पीपल के पेड़ गायब से होने लगे हैं, लेकिन जैसे ही कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को आक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ने लगी तो लोग भी सावधानी बरतने लगे।

ऐसे में लोग दिन का समय पीपल के पेड़ के नीचे गुजारने का प्रयास कर रहे हैं। जहां भी देखों वहां पर पीपल के पेड़ के नीचे लोग आसानी से बैठे हुए नजर आ जा रहे हैं। चन्दौसी शहर के गांधी पार्क में एक पीपल का पेड़ है। इस पेड़ के नीचे हर समय कोई न कोई बैठा हुआ आसानी से दिख जाता है। ऐसा लोग इस लिए कर रहे हैं क्योंकि पीपल का पेड़ सबसे ज्यादा आक्सीजन छोड़ता हैं।

पीपल का पेड़ सबसे ज्यादा आक्सीजन छोड़ता है। इसलिए लोग शारीरिक दूरी का पालन करते हुए पीपल के पेड़ के नीचे बैठे। इससे लोगों को काफी लाभ मिलेगा, लेकिन याद रखे कि पेड़ के नीचे भीड़ एकत्र न हो सके। हरवेंद्र सिंह, प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चन्दौसी

 

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