मुरादाबाद: ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र में यह पहला मौका है, जब करीब तीन सौ गावों के लोगों ने मुकद्दस रमजान का इस्तकबाल अंधेरे में किया। रोजेदारों ने अंधेरे में सहरी खाई और नमाज-ए-तरावीह भी अंधेरे में अदा की गई।

अंधेरे में अदा की गई नमाज-ए-तरावीह, बिनी बिजली के महिलाओं ने तैयार की सहरी

क्षेत्र के करीब तीन सौ गाव रविवार की शाम से पूरी तरह अंधेरे में डूबे हैं। इन गावों तक बिजली पहुंचाने के लिए बनी विद्युत लाइन और बिजली के पोल आधी में उखड़ गए। विभाग के अनुसार करीब ढाई सौ पोल और लाइन उखड़कर क्षतिग्रस्त हो गई है। रमजान का चाद देखने के बाद हर तरफ खुशी का माहौल बन गया। गांवों में तपती गर्मी के बीच बिजली नहीं होने से रमजान की खुशी भी फीकी रही। कई गांवों में मस्जिदों में जनरेटर चलाकर या फिर दीया रोशनी की गई और बगैर पंखे के तरावीह की नमाज अदा की गई। सहरी में भी बिजली नहीं होने पर महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

बिजली नहीं मिलने से कई स्थानों पर जलापूर्ति भी ठप - जुमेरात को तपती धूप में घरों पर रोजेदार गर्मी से बेहाल हो गए। घर पर पंखा कूलर चलाकर थोड़ी राहत मिल जाती है, परंतु बिजली नहीं होने पर हाथ के पंखे के सहारे वक्त का काटना पड़ा। च्यादातर घरों पर लगी मोचर पिछले चार दिन से बंद होने से लोग पानी को भी तरस गए। पानी के लिए सहरी के वक्त से ही सरकारी हैंडपंपों पर ग्रामीणों की लाइन लग गई। शरीफ नगर के ग्राम प्रधान एम इल्यास के अनुसार रमजान में सहरी के बाद फजर की नमाज के वक्त अंधेरा रहता है तो शाम को ईशा की नमाज के बाद मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की जाती है। दोनों वक्त रोशनी का होना जरूरी है। करीब दो किमी की लाइन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। विभागीय सुस्ती के चलते शीघ्र चालू होने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने शरीफ नगर समेत आसपास के गावों में सुरजन नगर बिजलीघर से से वैकल्पिक व्यवस्था करने की माग की है।

जेई पंकज कुमार के अनुसार पोल की व्यवस्था तो लगभग हो गई है, लेकिन लेबर मिलना मुश्किल हो रही है। इसकी वजह से विलंब हो रहा है, जबकि एसडीओ गौरव प्रकाश के अनुसार शीघ्र लाइनों पर कार्य प्रारंभ हो जाएगा। रोजेदारों का दर्द -रमजान का महीना तपती गर्मी में है। ऐसे में बिजली किल्लत रोजेदारों की परेशानी बढ़ा रही है। घर पर पंखा कूलर चलने से थोड़ी राहत रहती है।

हाफिज शुजाउद्दीन।

ज्यादातर घरों पर हैंडपंप नहीं -हैरानी है कि रोजेदारों को बिजली के साथ पानी की समस्या भी जूझना होगा। ज्यादातर घरों पर हैंडपंप नहीं हैं। मोटर नहीं चलने से पानी भी नसीब नहीं हो रहा है।

नसीम अहमद।

रात को उठकर अंधेरे में खाना बनाना -रमजान में महिलाओं के लिए बिजली का नहीं होना दिक्कत भरा होगा। रात को उठकर अंधेरे में खाना बनाना है। रोजे में दिनभर घर में रहकर काम करना कष्टदायक होगा।

मो. आलम। बिजली नहीं होने से रौनक नहीं दिखाई दे रही

-रमजान का महीना इबादत के साथ खुशी का भी होता है। यह रौनक सुबह शाम ही नजर आती है। उस वक्त बिजली नहीं होने से रौनक नहीं दिखाई दे रही है।

अख्तर हुसैन

Posted By: Jagran