मुरादाबाद, जेएनएन। Birju Maharaj Death : प्रसिद्ध कथक नर्तक पद्म विभूषण से सम्मानित बिरजू महाराज के निधन से शहर की कथक कलाकार रुकमणी खन्ना को 42 साल पुरानी यादें ताजा हो गईं। कथक कलाकार बिरजू महाराज का का सोमवार को हृदय गति रुकने से निधन होने के बाद रुक्मणी खन्ना मायूस हो गईं। यादें ताजा करते हुए कहती हैं कि मंडी चौक में उनके परिवार का कन्या संगीत महाविद्यालय संचालित होता था। तब बिरजू महाराज दिल्ली से बरेली किसी कार्यक्रम में जाते वक्त रुक्मणी खन्ना के आवास पर भी आए थे।

वह छह घंटे उनके घर रहे थे और कथक से संबंधित बातों पर भी चर्चा हुई थी। रुक्मणी बताती हैं कि मूलरूप से प्रयागराज निवासी बिरजू महाराज का दिल्ली में भी आवास था। वहां उनके परिवार से मिलने जा चुकी हैं। रुकमणी ने भले बिरजू महाराज से कथक नहीं सीखा था। लेकिन, वह उनके कथक से प्रभावित थीं और कथक के टिप्स लेती थीं। कहती हैं उनका जाना कथक की नर्सरी और युवाओं के लिए बहुत बड़ी क्षति है। रुकमणी ने इलाहाबाद के कन्हैया लाल से कथक सीखा था। लेकिन, बिरजू महाराज के चाचा चंद्रजी से पांच महीने कन्या संगीत महाविद्यालय में गीत सीखा था।

कहती हैं कि वह हंसमुख स्वभाव के थे और कथक की लय को आम बातचीत जैसे-सब्जी, बिस्कुट ले आओ, इसी में ऐसी लय निकालकर कथक के टिप्स सीखना आसान होता था। उनकी लयकारी भाव का जवाब नहीं था। रुक्मणी के घर बिरजू महाराज के सगे चाचा शंभू महाराज भी रुक्मणी के घर आ चुके हैं। कहती हैं कि जहां तक याद है कि मुरादाबाद में बिरजू महाराज किसी कार्यक्रम में नहीं आए थे।

रंगकर्मी डा. प्रदीप शर्मा ने बताया कि सुप्रसिद्ध कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज का निधन संगीत साधना के क्षेत्र में पूरे विश्व के लिए क्षति है। वह जितने अच्छे नृत्यकार थे उतने ही अच्छे गायक और वादक भी थे। ठुमरी और दादरा के वह एक श्रेष्ठ गायक थे। उनकी संगीत सेवा के लिए अनेक अवार्ड उन्हें प्रदान किए गए। पद्मभूषण पंडित बिरजू महाराज का पूरा जीवन संगीत के लिए समर्पित रहा। उन्होंने फिल्मी दुनिया में भी अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया प्रतिष्ठित फिल्म कलाकार माधुरी दीक्षित का उन्होंने दो बार नृत्य का निर्देशन किया। 

Edited By: Samanvay Pandey