मुरादाबाद (मोहन राव)। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अफसर से लेकर आम लोग तक मास्क लगाकर ही घर से निकल रहे हैं। विकास के दफ्तर में मास्क का एक रोचक किस्सा सामने आया है। एक अधिकारी जिस मास्क को प्रयोग कर रहे थे। उसके बारे में जानकार परेशान हो गए। मास्क को 24 घंटे में बदलने के बजाय चार-पांच दिन से लगा रहे थे। अस्पताल में भी उसी मास्क को लगाकर चले गए थे। तब पता चला कि इस मास्क को 24 घंटे बाद फेंक देना चाहिए तो उनके होश उड़ गए। बोले, इसे तो कई दिनों से लगा रहा हूं। पता करने लगे कि बढिय़ा वाला मास्क कौन है। फिर अच्छे वाले मास्क तत्काल ही मंगाने का तत्काल आर्डर भी दे दिया। मास्क को लेकर परेशान साहब ने पूछा कि इसे तो अधिक दिन लगाया है, परेशानी तो नहीं होगी। उनको सभी से यही जवाब मिला कि अब इसे फेंक दीजिए।

एक बाबू का जलवा

सेहत वाले महकमे में तैनात एक बाबू की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है। बाबू की पहुंच ऊपर तक होने के कारण कोई उसे टोकता भी नहीं है। स्वास्थ्य महकमे में उसी की सुनी जा रही है। इसे लेकर कर्मचारी परेशान हैं। बता रहे हैं कि बाबू का जलवा इस कदर है कि साहब भी उसको कुछ नहीं बोल सकते। चर्चा है कि यहां से लखनऊ तक पहुंच होने के कारण उसे हटाया भी नहीं जा रहा। एक-दो बार ट्रांसफर हुआ था लेकिन, किसी न किसी कारण वह रद्द हो गया। बाबू के इसी जलवे को देखकर अधिकारी-कर्मचारी परेशान हैं। कर्मचारी कह रहे हैं कि साहब तो हमारी सुन ही नहीं रहे, अब क्या करें। बाबू के जलवे का आलम यह है कि उसी के कहने पर साहब दूसरे कर्मचारियों को डांट भी लगा देेते हैं। चर्चा इस बात की है कि बाबू के इस जलवा के पीछे है कौन।

घर से निकलने का संकट

विकास के दफ्तर में एक फाइल पर हस्ताक्षर कराने के लिए एक अधिकारी को कई अफसरों ने फोन कर दिया लेकिन, वे सभी को घुमाते रहे। अभी आ रहा हूं, घंटे भर लगेगा। अफसर भी सुनते-सुनते परेशान हो गये तो बड़े साहब को ही फोन लगा दिया। बताया गया कि हमारे बाबू को बताओ, अभी हस्ताक्षर करा देगा। बड़े साहब का नाम लेकर उससे काम करने के लिए कहा गया तो बड़ी मुश्किल से बाबू साहब ने फाइल का काम निपटाया। दरअसल, काम का संकट कोरोना के कारण है। विकास के दफ्तर के अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी घर से ही काम कर रहे हैं। जो दफ्तर आ रहे हैं वे भी घंटे-दो घंटे में घर चले जा रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि कोरोना के चलते मुश्किल हो गई है, क्या करें, घर पर भी अच्छा नहीं लग रहा है। दफ्तर में कुछ समय बैठ लेते हैं तो ठीक रहता है।

सकरकटा के किस्से और कोरोना

कोरोना को भगाने के लिए इस समय सकरकटा के किस्से खूब मशहूर हो रहे हैं। अधिकारी और कर्मचारी अपने चाहने वालों को बता रहे हैं कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं। सकरकटा की रियासत जब खत्म हो गई तो हम थोड़ी सी सावधानी बरत कर कोरोना को भी भगा सकते हैं। किसानों के लिए बने दफ्तर में इस समय सकरकटा के किस्से ही सुनाई दे रहे हैं। बड़े साहब कहते हैं कि जब सकरकटा फंस गया तो अपने साथियों से बोला था कि पूंछ से छूटेंगे तो बटेश्वर मेला में आकर मिलेेंगे, यही हाल कोरोना का है। जब हम लोग घर से बाहर ही नहीं निकलेंगे तो कोरोना खुद व खुद मर जाएगा। साहब के मुंह से सकरकटा की कहानी सुनकर कर्मचारी कह रहे है कि साहब की बात बिल्कुल सही है। अब गांव-गांव जाकर हम भी लोगों को यही कहानी सुनाएंगे, ताकि कोई भी कोरोना से डरे नहीं।

Posted By: Narendra Kumar

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