मुरादाबाद, जेएनएन। अक्सर लोग चिकित्सकों की हैंड राइटिंग को लेकर सवाल खड़े करते हैं। ज्यादा परेशानी उन मरीजों को होती है जिनके लिए चिकित्सक दवाएं लिखते हैं। दवाओं के नाम स्पष्ट न होने से दवा लेने के लिए पहुंचे तीमारदार मेडिकल स्टोर से मिले दवाओं का मिलान भी सही तरीके से नहीं कर पाते हैं। ग्रामीण और कम शिक्षित मरीजों के लिए तो ये बहुत ही मुश्किल हो जाता है। मंगलवार को जिला अस्पताल में जो कुछ हुआ उससे एक बार फिर से चिकित्सकों की हैंड राइटिंग को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

जांच के लिए पहुंची थीं चिकित्सक

दरअसल नीति आयोग द्वारा भेजी गईं नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड हास्पिटल (एनएबीएच) की चिकित्सक जिला अस्पताल में ऑडिट करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्हें डॉक्टरों की राइटिंग खराब मिली। इस पर उन्होंने असंतोष जताया। एनएबीएच की चिकित्सक अंजू वर्मा जिला अस्पताल पहुंची थीं। नीति आयोग को पहले भेजी गई रिपोर्ट देखने के बाद ऑडिट किया।

परेशानी से इस तरह बचें

यदि कोई चिकित्सक पर्चे पर दवाओं को स्पष्ट नहीं लिखता है तो उससे उसी समय कंफर्म कर लें। मेडिकल स्टोर से दवा लेने के बाद चिकित्सक को जरूर दिखा लें। कई बार चिकित्सक की लिखी दवाएं न मिलने पर मेडिकल स्टोर वाले दूसरी दवाएं दे देते हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

 

Posted By: Narendra Kumar

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