मुरादाबाद, जेएनएन। मेरी सांसें उखड़ रहीं हैं, ठीक से बात नहीं कर पा रही हूं सर। आप ख्याल रखिएगा, बहुत ही खतरनाक बीमारी है...और कालेज में सब ठीक चल रहा है न। टीएमयू में भर्ती 62 वर्षीय डॉ.मीना कौल की फोन पर ये आखिरी बात एमएच कालेज के प्रबंधक काव्य सौरभ रस्तोगी से हुई थी।

करीब पांच मिनट तक काव्य सौरभ रस्तोगी से बात हुई थी। हमेशा दूसरों को हिम्मत देने वाली डॉ.मीना कौल सौरभ रस्तोगी से बात करते हुए थोड़ा निराश जरूर थीं लेकिन जीवटता का भाव था। इन शब्दों को बयां करते हुए काव्य सौरभ भी भावुक हो गए। अंत तक जीवटता दिखाने वाली डॉ.मीना कौल को शायद नहीं मालूम था क‍ि कोरोना उन्हें काल का ग्रास बना लेगा। हिंदी प्रेमी, संवेदनशीलता की रचनाकार डॉ. मीना कौल ने विवाह नहीं किया था। माता-पिता के निधन के बाद छोटे भाई सौरभ कौल व विम्मी कौल को शिक्षा को आगे बढ़ाया। पांच बहनें व एक भाई में डॉ.मीना कौल बीच की थीं। बहनों में ममता शर्मा, सुनीता शर्मा से छोटी डॉ.मीना कौल थीं। इनसे छोटी निशा पाठक व विम्मी कौल थीं और सबसे छोटे भाई सौरभ कौल हैंं। वह लाजपतनगर में भाई-भाभी के साथ ही रहती थीं। परिवार का पूरा सहयोग करने वाली डॉ.मीना कौल का जाना साहित्य और शिक्षा के लिए खालीपन है। उन्होंने अपने लिए जीवन नहीं जिया बल्कि हिंद साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। माता माधरी कौल की स्मृति में वह मेधावियों को हर साल सम्मानित करती थीं, जिसमें शिक्षा, साहित्य, समाज से जुड़े लोग माता-पिता के प्रति इस तरह की श्रद्धाजंलि के कायल थे। कोरोना पाजिटिव रिपोर्ट आने के बाद वह 14 अप्रैल को टीएमयू में भर्ती हुई थीं।

भाई-भाभी भी संक्रमित, बहन ने दी मुखाग्निी

स्व.डॉ.मीना कौल के भाई सौरभ कौल, भाभी भावना कौल व भतीजा आदित्य कौल भी संक्रमित हैं और टीएमयू में भर्ती हैं। पूरा परिवार संक्रमित होने से उनकी बहनें टूट गईं हैं। गांधी नगर पब्लिक स्कूल की शिक्षिका एवं छोटी बहन विम्मी कौल ने उन्हें कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए मुखाग्नी दी। 

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