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मुरादाबाद में 1000 करोड़ की नजूल जमीन का बड़ा खेल: बिल्डरों ने बेच डाली 11 एकड़ भूमि, सपा दफ्तर भी घेरे में

Published: Fri, 04 Sep 2026 10:07 PM (IST)

मुरादाबाद में 1000 करोड़ की 11 एकड़ नजूल भूमि बिल्डरों द्वारा बेचे जाने और सपा कार्यालय का भी नजूल भूमि ...और पढ़ें

जिला समाजवादी पार्टी कार्यालय जागरण आर्काइव

जिला समाजवादी पार्टी कार्यालय जागरण आर्काइव

HighLights

  1. चक्कर की मिलक रोड पर एक हजार वर्ग मीटर भूमि पर बना सपा कार्यालय भी नजूल भूमि पर

  2. ज्यादातर मामलों में कोर्ट से राहत ले आए कब्जेदार, प्रशासन की ओर से मजबूत पैरवी की दरकार

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। शासन स्तर से नजूल संपत्तियों (भूमि-भवन आदि) के नए सिरे से सर्वे के आदेश के बाद दबे मामले भी निकलकर सामने आने लगे हैं। जिले में बीते दिनों चक्कर की मिलक स्थित सपा कार्यालय का मामला सुर्खियों में रहा। एक हजार करोड़ की 11 एकड़ नजूल भूमि बिल्डरों द्वारा बेच दिये जाने का मामला मुद्दा बना।

कई और मामले सामने आए। प्रशासन की ओर से नोटिस की कार्रवाई के बाद अवैध कब्जेदार कोर्ट की शरण में पहुंच गए। ज्यादातर मामलों में कोर्ट से राहत ले आए जिसके बाद कार्रवाई आगे ही नहीं बढ़ सकी। बेशकीमती भूमि से अवैध कब्जा हटवाने के लिए प्रशासन की ओर से मजबूत पैरवी की दरकार है।

चक्कर की मिलक (सिविल लाइंस) स्थित समाजवादी पार्टी का जिला कार्यालय (कोठी नंबर-4) लगभग 1000 वर्ग मीटर भूमि पर बना है। यह दफ्तर वर्ष 1994 से संचालित हो रहा है और इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था।

राजस्व अभिलेखों की जांच में इस भूमि का आवंटन नियमों के विरुद्ध पाया गया, जिसके बाद इसका आवंटन निरस्त कर दिया गया और इसे खाली कराने के निर्देश दिए गए। मगर, कोर्ट मामला पहुंचने के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी और पूरा प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया।

दूसरा सबसे चर्चित मामला एमए मिशन मैथोडिस्ट चर्च को किये गए पट्टे का सामने आया। 11 एकड़ नजूल भूमि साल 1917 में एमए मिशन मैथोडिस्ट चर्च को पट्टा हुआ था। पट्टा इस शर्त पर किया गया था कि 90 वर्ष बाद भूमि स्वत: नजूल में दर्ज हो जाएगी।

30-30 साल पर पट्टे का नवीनीकरण कराना होगा। कोई नया निर्माण नहीं कराया जाएगा। यहां तक कि बिना जिलाधिकारी की अनुमति के तय शर्त के अलावा कुछ नहीं किया जा सकता।

मगर, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पट्टे की शर्तों का उल्लंघन करते हुए भूमि बरेली की फर्म विलियम कंस्ट्रक्शन को डीड कर दी। डीड भी बाकायदा पट्टे का हस्तांतरण करने की बात कहते हुए की गई।

बेचने तक के अधिकार दे दिये जबकि राजस्व नियमाें के अनुसार पट्टे का पट्टा नहीं होता। विलियम कंस्ट्रक्शन ने साल 2013 में पूरी भूमि अवैध रूप से प्लाटिंग करके बेच दी जिस पर व्यवसायिक कांम्प्लेक्स से लेकर आलीशान कोठियां तक बन गईं।

एडीएम ने जांच रिपोर्ट में इससे एक हजार करोड़ की क्षति का आंकलन किया गया। प्रकरण में भी एडीएम वित्त एवं राजस्व ममता मालवीय की ओर से संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किये गए। यह मामला भी कोर्ट में पहुंच गया और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। नजूल भूमि के ऐसे और चर्चित मामले हैं जिस पर रसूखदारों ने कब्जा कर रखा है।

अस्पताल की आड़ में दबा दी नजूल भूमि

सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित एक निर्माणाधीन अस्पताल का मामला भी बीते दिनों सुर्खियों में आया। पता चला कि अस्पताल में नजूल भूमि दबा ली गई। प्रकरण में भी कार्रवाई शुरू हुई। मगर, आगे कुछ नहीं हुआ।

नतीजा यह हुआ कि अस्पताल आलीशान होटल के रूप में तैयार हुआ और शुरू भी हो गया। निर्माण के बाद नजूल भूमि से कब्जा हटवाना अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगा। फिलहाल, अब नए सिरे से सर्वे के बाद पूरी रिपोर्ट पर सभी की नजर है।

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