मुरादाबाद में घर के पास पहुंचा तेंदुआ, महिला ने शोर मचाकर बचाई जान
मुरादाबाद और अमरोहा में गन्ने के खेतों से निकलकर तेंदुए अब घरों के पास तक पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीण और किसान दहशत में हैं।

घर के पास पहुंचा तेंदुआ।
HighLights
मुरादाबाद-अमरोहा में तेंदुए घरों के पास तक पहुंच रहे।
गन्ने की कटाई के समय किसानों में बढ़ा जान का डर।
वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की।
जागरण टीम, मुरादाबाद। गन्ने के खेतों में छिपे तेंदुए अब घरों की चौखट तक पहुंचने लगे हैं। गुरुवार को बहापुर बलिया और लालापुर पीपलसाना में तेंदुआ दिखाई देने से ग्रामीण फिर दहशत में आ गए। लालापुर पीपलसाना में घर के पास कूड़ा डालने जा रही रामकली के सामने अचानक तेंदुआ आ गया। महिला के शोर मचाने पर स्वजन और ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर दौड़े तो तेंदुआ गन्ने के खेत में घुस गया। ग्रामीणों ने काफी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका।
बहापुर बलिया गांव में भी शाम करीब पांच बजे ग्रामीण हरपाल सिंह ने गांव की पश्चिम दिशा में झाड़ियों से निकलकर सड़क पार करते तेंदुए को देखा। उनके शोर मचाने पर ग्रामीण जुट गए। वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और खेतों व झाड़ियों में तेंदुए की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
गुरुवार को इसी खौफ के बीच ठाकुरद्वारा रेंज के सैंजनी क्षेत्र में एक तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया। इसके साथ जिले में अभियान के तहत रेस्क्यू किए गए तेंदुओं की संख्या 13 पहुंच गई है हालांकि नए क्षेत्रों में लगातार तेंदुए दिखाई देने से ग्रामीणों की चिंता बरकरार है।
भाकियू ने मंडलायुक्त से की सड़कों की मरम्मत कराने की मांग
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष घनेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर तेंदुआ और किसानों की समस्याएं भी उठाईं। किसानों ने ठाकुरद्वारा-सुरजननगर मार्ग की बदहाली पर कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि रामनगर खागूनाला, शरीफनगर, मुंढामारखेड़ा खालसा मंदिर समेत कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त है। दो से तीन फीट गहरे गड्ढों में पानी भरा रहने से बाइक और ई-रिक्शा सवार आए दिन चोटिल हो रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने गन्ने के भुगतान का मुद्दा भी उठाया। किसानों ने कहा कि तेंदुए के डर से खेतों में जाना मुश्किल है तो बदहाल सड़क ने गांव से बाहर निकलना भी जोखिम भरा बना दिया है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अंधेरा होने के बाद अकेले बाहर न निकलने, खेतों में जाते समय सतर्क रहने और तेंदुआ दिखने पर उसके करीब न जाने की अपील की है।
अक्टूबर के अंत से शुरू होगी गन्ने की कटाई
गन्ना नहीं काटेंगे तो घर कैसे चलेगा और खेत में जाएंगे तो पता नहीं वापस लौटेंगे या नहीं... शेरपुर पट्टी के किसान महीपाल सिंह की यह बात सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों की बेचैनी है, जिनकी रोजी-रोटी गन्ने की खेती पर निर्भर है। महीपाल सिंह का चार एकड़ में गन्ना तैयार है।
महीनों की मेहनत फसल के रूप में सामने है, लेकिन खेत की मेंढ़ पर खड़े होते ही खुशी के बजाए तेंदुए का डर सताने लगता है। बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च के लिए जरूरी गन्ना अब जान के लिए खतरा बन गया है।
जिले में करीब 86 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है और इससे करीब 1.52 लाख किसान जुड़े हैं। इनमें रामगंगा और कोसी किनारे के गांवों के किसानों की निर्भरता और अधिक है। तेंदुआ प्रभावित करीब 52 गांवों में घने गन्ने के खेतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह में कटाई शुरू होगी तो किसानों को खेतों में उतरना ही पड़ेगा। यही सोचकर गांवों में अभी से डर बैठ गया है। लालापुर पीपलसाना के रोहित सैनी कहते हैं कि गांव चारों तरफ से गन्ने के खेतों से घिरा है। कई जगह फसल घरों के बिल्कुल पास खड़ी है।
कटाई के दौरान किसान को खेत के भीतर जाना होगा, लेकिन घनी फसल में तेंदुआ कहां छिपा है, इसका पता लगाना आसान नहीं होता है। उनकी चिंता है कि आखिर किसान अपनी फसल काटे तो कैसे? बलिया के हरपाल सिंह भी इसी परेशानी से घिरे हैं। उनका कहना है कि गन्ना अचानक छोड़ देना संभव नहीं है। इसमें पूरे साल की मेहनत लगी है और परिवार की जरूरतें इससे जुड़ी हैं लेकिन, जिंदगी से बड़ा कुछ नहीं।
कटाई के दौरान किसानों को समूह में खेतों में जाना होगा और हर कदम पर सावधानी बरतनी होगी। रामगंगा किनारे के जेनेगर, बाहपुर, बलिया, बंदे वाली मढ़ैय्या, रायभूड़, मलकपुर सेमली, चावड़, सुल्तापुर खद्दर, वीरूवाला, मुस्तुफाबाद और टिगरी समेत कांठ व डिलारी क्षेत्र के कई गांवों में किसान इसी दोहरी चिंता में हैं।
खेत में खड़ी फसल उन्हें पुकार रही है और गन्ने की कतारों में छिपे खतरे का डर उन्हें रोक रहा है। किसान जानते हैं कि गन्ना काटे बिना परिवार का खर्च नहीं चलेगा। जिस गन्ने को किसान ने पूरे साल अपने खून-पसीने से सींचा है, अब उसी खेत में कदम रखने से पहले उसे सोचना पड़ रहा है कि फसल काटें या जान बचाएं।
रामगंगा के खादर में तेंदुओं को रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। गन्ने की कटाई के समय विशेष सावधानी बरती जाएगी। किसानों से समूह में कटाई करने, अकेले खेत में न जाने और तेंदुआ दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है। -आदर्श कुमार, वन संरक्षक, मुरादाबाद मंडल।
ग्रामीणों का आरोप-तेंदुए को पकड़ने के लिए नहीं पहुंची वन विभाग की टीम
जागरण संवाददाता, अमरोहा: शहर की सीमा से सटी ग्राम पंचायत कांकर सराय उर्फ काजी सराय समेत आसपास के कई गांवों में तेंदुए की दहशत बनी हुई है। किसान खेतों पर जाने से डर रहे हैं। गुरुवार सुबह कांकर सराय के जंगल में चारा लेने पहुंचे किसान पिता-पुत्र पर तेंदुआ झपट पड़ा। दोनों ने शोर मचाते हुए भागकर किसी तरह जान बचाई।
तेंदुआ कुछ दूर तक उनके पीछे भी दौड़ा। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है।
कांकर सराय निवासी किसान अहसान अली गुरुवार सुबह करीब सात बजे अपने छोटे बेटे अरमान अली के साथ पशुओं के लिए चारा लेने खेत पर गए थे। दोनों पड़ोसी किसान हारून और यासीन के खेतों की मेड़ के पास पहुंचे तो उन्हें तेंदुआ दिखाई दिया। अरमान के अनुसार, उनके पिता उनके पीछे चल रहे थे।
दोनों जैसे ही तेंदुए के करीब पहुंचे, वह अचानक उनकी ओर झपट पड़ा। तेंदुए को अपनी ओर आता देख पिता-पुत्र घबरा गए और शोर मचाते हुए वापस भागने लगे। तेंदुआ कुछ दूर तक उनके पीछे भी दौड़ा, लेकिन दोनों किसी तरह वहां से निकलकर गांव पहुंचे।
उन्होंने ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद कई लोग जंगल में तेंदुए की तलाश करने पहुंचे, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। दहशत के कारण कई ग्रामीण जंगल की ओर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
डेढ़ माह से दिख रहा तेंदुआ
किसानों का दावा है कि कांकर सराय, मीरा सराय और जोया मार्ग पर श्यामपुर समेत आसपास के कई गांवों के जंगल में करीब डेढ़ माह से तेंदुआ लगातार दिखाई दे रहा है। इससे पहले शराफत हुसैन, श्याजुउद्दीन, नईम अहमद और ताहिर हुसैन समेत कई किसानों ने भी तेंदुआ देखने की बात कही है।
तेंदुए की दहशत के कारण किसान खेतों पर जाने से कतरा रहे हैं। इससे गन्ना, धान और अन्य फसलों में खाद डालने और स्प्रे करने का काम भी प्रभावित हो रहा है। किसानों का आरोप है कि कई बार जानकारी देने के बावजूद वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए गंभीर प्रयास नहीं कर रही है। उन्होंने जंगल में पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग की है।
यह क्षेत्र हैं तेंदुआ से प्रभावित
जिले में सबसे अधिक तेंदुआ देखे जाने के मामले नौगावां सादात क्षेत्र में सामने आए हैं। अलीपुर कलां, कौराल और जमनाखास के अलावा अमरोहा क्षेत्र के कांकर सराय, बुढ़नपुर और मऊ मयचक गांवों के जंगल में भी तेंदुआ दिखाई देने की सूचना मिलती रही है। मंडी धनौरा के रम्पुरा खादर, मुकारमपुर और रजबपुर क्षेत्र के पीठखेड़ा गांव के जंगल भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। मंडी धनौरा क्षेत्र में तेंदुआ दो लोगों और रायपुर खुर्द में एक किसान पर हमला कर चुका है।
कांकर सराय के जंगल में तेंदुआ देखे जाने की जानकारी मिली है। टीम भेजकर जानकारी जुटाई जा रही है। गांव के जंगल में पिंजरा भी लगाया जाएगा। -राजीव कुमार, डीएफओ।
