मुरादाबाद के 'अरबपतियों' का खुला राज: मंच पर मिली शील्ड, लेकिन बैंक बैलेंस में निकला कुछ और!
मुरादाबाद में औद्योगिक निवेश के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया है। हजारों करोड़ के एमओयू साइन हुए, ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। निवेश आकर्षित करने के दावों के बीच मुरादाबाद की औद्योगिक हकीकत अलग है। हजारों करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए, मंचों पर उपलब्धियों के ढोल बजे, लेकिन जब प्रोजेक्ट जमीन पर उतरने की बारी आई तो रफ्तार लड़खड़ा गई। फरवरी 2026 तक की एमओयू मानिटरिंग रिपोर्ट बताती है कि जिले में निवेश का बड़ा हिस्सा अब भी अधूरा है।
पीतलनगरी में औद्योगिक निवेश को लेकर बड़े दावे किए गए। एमओयू मानिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 24,536 करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए, लेकिन इनका पूरा असर अभी तक जमीन पर नहीं दिखा है। रिपोर्ट बताती है कि 198 परियोजनाएं ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए तैयार थीं, लेकिन केवल 156 ही वाणिज्यिक उत्पादन तक पहुंच पाईं।
मुरादाबाद: धरातल पर उतरे प्रमुख औद्योगिक प्रोजेक्ट्स
| क्र.सं. | प्रोजेक्ट का नाम | निवेश की राशि (करोड़ में) |
| 1 | हिंद टर्मिनल प्रा. लि. | ₹1250 करोड़ |
| 2 | लोहिया आवासीय योजना | ₹1000 करोड़ |
| 3 | त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज | ₹250 करोड़ |
| 4 | करीमगंज बायोफ्यूल | ₹200 करोड़ |
| 5 | पशुपति एक्रिलोन | ₹167.6 करोड़ |
| 6 | परंपरा एलीट हाउसिंग | ₹120 करोड़ |
12 हजार करोड़ के निवेशक अंतिम चरण में रह गए। इनमें से बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट अब भी अधर में हैं। उत्पादन प्रतिशत 78.79 प्रतिशत रहने के बावजूद मुरादाबाद की रैंक 25 रही, जो जिले की औसत स्थिति को दर्शाता है। निवेश मित्र पोर्टल की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है।
करीब 20 प्रतिशत निवेशकों ने आवेदन वापस ले लिए, जबकि कई मामलों में ऐसे लोग बड़े निवेशक बनकर सामने आए जिनकी वास्तविक क्षमता सीमित थी। जांच के बाद कई प्रोजेक्ट निरस्त भी करने पड़े। इससे यह साफ होता है कि निवेश की गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
मुरादाबाद मंडल: औद्योगिक उत्पादन और ग्रेडिंग रिपोर्ट
| जिला | उत्पादन प्रतिशत (%) | प्राप्त ग्रेड / स्थिति |
| संभल | 85.56% | सबसे बेहतर (लक्ष्य से दूर) |
| बिजनौर | 72.87% | ग्रेड सी |
| अमरोहा | 72.60% | ग्रेड बी |
| रामपुर | 72.55% | ग्रेड सी |
जिले में कुछ बड़े प्रोजेक्ट जरूर जमीन पर उतरे हैं, लेकिन उनकी संख्या कुल एमओयू के मुकाबले कम है। जिले में निवेश मित्र पोर्टल के जरिए आए प्रस्तावों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। करीब 20 प्रतिशत निवेशकों ने बीच में ही अपने आवेदन वापस ले लिए।
कुछ लोगों ने 1000 करोड़ रुपये तक के निवेश का दावा किया, लेकिन जमीनी हकीकत में वे छोटे कारोबारी निकले। ऐसे कई निवेशकों को सरकारी मंचों पर सम्मानित भी किया गया। बाद में जब वास्तविकता सामने आई तो प्रशासन को प्रोजेक्ट निरस्त करने पड़े।
मुरादाबाद में कुल 12 हजार करोड़ का निवेश किए जाने के लिए एमओयू हुए थे। इसमें से 80 प्रतिशत लक्ष्य हमने पूरा कर लिया। 20 प्रतिशत निवेशक नहीं आए। दलपतपुर का हिंद टर्मिनल जिले की बड़ी उपलब्धि है। इससे विकास की रफ्तार मिलेगी।
- योगेश कुमार, संयुक्त आयुक्त, उद्योग
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