अमेरिकी टैरिफ विधेयक अटकने से निर्यातकों को मिली राहत, मुरादाबाद से होता है 12 हजार करोड़ का निर्यात
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने वाला विधेयक अटकने से मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। अमेरिकी बाजार को लेकर पहले से ही असमंजस में चल रहे मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए राहत की खबर है। रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की शक्ति देने वाला अमेरिकी विधेयक प्रतिनिधिसभा में अटक गया है।
इसके नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले आगे बढ़ने की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में भारत पर नए शुल्क का तत्काल खतरा टलता दिख रहा है। इसको लेकर मुरादाबाद के निर्यातकों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि फिलहाल तो क्रिसमस से जुड़े उत्पाद भेजे जा सकते हैं।
यह राहत मुरादाबाद के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां का हस्तशिल्प कारोबार बड़े स्तर पर अमेरिकी बाजार से जुड़ा है। शहर से होने वाले करीब 12 हजार करोड़ रुपये के हस्तशिल्प निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग पांच हजार करोड़ रुपये बताई जाती है।
निर्यातक पहले ही अमेरिकी शुल्क, महंगे कच्चे माल, बिजली संकट और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता तो उसका सीधा असर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत और प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता था।
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोटर्स एसोसिएशन संरक्षक नजमुल इस्लाम ने बताया कि विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता था।
भारत रूस से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है। वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रही।
एक्सपोट्रर्स वाइस एसोसिएशन महासचिव विशाल अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन अमेरिकी नीति में बदलाव की आशंका समाप्त नहीं हुई है, इसलिए मुरादाबाद के निर्यातकों को अमेरिका के साथ यूरोप, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया और अन्य बाजारों में खरीदार बढ़ाने की रणनीति पर काम करना होगा।
