मुरादाबाद, जेएनएन। डॉक्टर साहब, नमस्ते, मेरे पिता जी की हालत ठीक नहीं है। कोरोना की पॉजिटिव रिपोर्ट मिली है। शरीर की ऑक्सीजन 94 से कम हो गया है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। उन्हें एंबुलेंस की ऑक्सीजन पर रखा हुआ है। आपके अस्पताल के बाहर खड़े हैं। किसी तरह एक बेड की व्यवस्था होने के साथ ही इलाज मिल जाए तो उनकी जान बच जाएगी।

डॉक्टर इतना सुनने के बाद सीधे बोल रहे हैं कि भाई हमारी मजबूरी है, वेंटीलेटर, बाइपैप, ऑक्सीजन बेड सब पर मरीज हैं। हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजोंं को भर्ती कर इलाज दें लेकिन, व्यवस्था नहीं है। किसी दूसरे अस्पताल में प्रयास करिये। ये हालात जिले के हर अस्पताल के हो चुके हैं। मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इसलिए हालात को समझिये और खुद ही घरों में लॉक हो जाइये। आपके किसी अपने के साथ ऐसा न हो। जो अस्पतालों में भर्ती हैं। वो भी स्वस्थ होकर अपनों के पास पहुंचें।

ऑक्सीजन बेड के लिए इंतजार

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में लोगों के शरीर का ऑक्सीजन कम हो रहा है। ऐसे में अस्पतालों की ओर मरीज दौड़ लगा रहे हैं। लोधीपुर के 52 वर्षीय बुजुर्ग का ऑक्सीजन स्तर 85 हो गया था। उन्हें एंबुलेंस से दिल्ली रोड नया मुरादाबाद स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लाया गया था। अस्पताल में बेड फुल होने पर भर्ती नहीं किया जा सका। गार्ड ने मरीज को अंदर ले जाने से पहले ही रोक दिया था। एंबुलेंस में उनकी ऑक्सीजन चालू थी। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। जहां उन्हें 40 मिनट इंतजार के बाद जांच के बाद एल-थ्री अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।

मह‍िला को वेंट‍िलेटर की जरूरत 

गांधी नगर की 53 वर्षीय बुजुर्ग महिला की रिपोर्ट एंटीजन निगेटिव है। सीटी-स्कैन में फेफड़ों पर निमोनिया बुरी तरह असर कर चुका है। शरीर का ऑक्सीजन स्तर तकरीबन 70 के करीब पहुंच चुका है। परिवार के लोगों ने 24 घंटे तक घर में ही ऑक्सीजन की व्यवस्था करके किसी तरह मेनटेन किया। विशेषज्ञ ने सलाह दी कि इन्हें वेंटीलेटर की जरूरत है। इसके बिना काम नहीं चलेगा। इसके बाद परिवार के हर सदस्य ने अस्पतालों की दौड़ लगा दी। शाम तक खोजबीन करने के बाद भी किसी अस्पताल में एक भी वेंटीलेटर नहीं मिल पाया। रात तक मरीज की हालत और भी बिगड़ने लगी है।

तीमारदार खुद ही ले जा रहे स्ट्रेचर

हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अस्पतालों में जगह नहीं है। एक मरीज को रेफर करने के बाद ही दूसरे मरीज का नंबर लग पा रहा है। ऐसे हालात में मरीज को गेट से इमरजेंसी तक ले जाने का भी मसला हो गया है। एंबुलेंस के गेट पर लगते ही स्ट्रेचर की तलाश शुरू हो जाती है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी मुख्य द्वार से अंदर तक जाने के लिए स्ट्रेचर तलाशी जा रही है। 

 

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप